टीएमसी: ममता का 'देश भर में फैलो और पार्टी तोड़ो अभियान' जारी, जानिए नुकसान कांग्रेस का या भाजपा का

Pratibha Jyoti प्रतिभा ज्योति
Updated Tue, 23 Nov 2021 04:35 PM IST

सार

लाल कृष्ण आडवाणी के करीबी रहे सुधींद्र कुलकर्णी और जावेद अख्तर ने मंगलवार को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से मुलाकात की है। कयास लग रहे हैं दोनों तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। दूसरी तरफ जद (यू) से पवन वर्मा टीएमसी में शामिल हो गए हैं।  कहा जा रहा है कि टीएमसी में शामिल होने वाले नेताओं की एक लंबी फेहरिस्त है। 
सुधींद्र कुलकर्णी, जावेद अख्तर, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी
सुधींद्र कुलकर्णी, जावेद अख्तर, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी - फोटो : Twitter : @AITCofficial
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विस्तार

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी अभी दिल्ली दौरे पर हैं और चर्चा हैं कि वे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात कर सकती हैं। उससे पहले ममता की मौजदूगी में कांग्रेस के पूर्व नेता अशोक तंवर और कांग्रेस नेता कीर्ति आजाद टीएमसी में शामिल हो गए हैं। राष्ट्रीय राजनीति में आने और पार्टी का देश भर में विस्तार करने के मकसद से तृणमूल कांग्रेस का पार्टी तोड़ो अभियान जारी है। इसके लिए टीमसी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) समेत कई पार्टियों के नेताओं को निशाना बना रही है ताकि अलग-अलग राज्यों में टीएमसी का संगठन मजबूत हो और 2024 के लोकसभा चुनाव में वह एक मजबूत संगठन और पैन इंडिया मौजूदगी के साथ उतर सकें।  
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सेक्युलर नेताओं के लिए टीएमसी बना नया प्लेटफॉर्म
बंगाल की राजनीति को खूब समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार गौतम लहरी कहते हैं ममता उन्हीं लोगों को जोड़ रही हैं जो कांग्रेस या दूसरी पार्टियों में किनारा कर दिए गए हैं या उपेक्षित है। भाजपा में जो हार्ड कोर संघ की पृष्ठभूमि वाले लोग हैं वे तो टीएमसी में नहीं आएंगे, लेकिन सेक्युलर छवि वाले नेता जो एक दूसरे विकल्प की तलाश कर रहे हैं उन्हें टीएमसी एक प्लेटफॉर्म मुहैया करा रही है। यही सेक्युलर छवि वाले नेता पैन इंडिया टीएमसी की मौजदूगी के बाद 2024 में ममता को प्रधानमंत्री पद के लिए  दमदार उम्मीदवार घोषित कर सकते हैं।   


कांग्रेस का विकल्प बनने की तैयारी
लहरी बताते हैं ‘टीएमसी कांग्रेस का विकल्प बनने की कोशिश कर रही है। पार्टी इस मकसद में कितना कामयाब होगी यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन इतना है कि इससे सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस का है, भाजपा को इससे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचने वाला। चूंकि कांग्रेस अभी राज्यों में कमजोर स्थिति में है और तृणमूल कांग्रेस में नेताओं को एक उम्मीद नजर आ रही है’।  
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