UP Assembly Election 2022: जो चमत्कार 2017 में राहुल नहीं कर पाए, क्या अगले चुनाव में प्रियंका ‘दीदी’ वो कमाल दिखाएंगी

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Mon, 18 Oct 2021 06:32 PM IST

सार

2017 के विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी केंद्र में थे। ठीक पांच साल बाद चुनावी नैया को पार करने की पतवार उनकी बहन और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में ‘दीदी’ के नाम से मशहूर प्रियंका गांधी के हाथों में हैं। जो चुनाव अभियान का सीधे तौर पर नेतृत्व कर रही हैं। इसलिए इस बार यह परीक्षा मुख्य रूप से प्रियंका गांधी की ही है। इस परीक्षा को पास करने के लिए प्रियंका महिलाओं को सीधा अपने साथ जोड़ रही हैं। वे कल लखनऊ में प्रदेश भर से आईं महिलाओं से बात करेंगी। वे चाहती हैं कि टिकट बंटवारे में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिया जाए।
बनारस में हुई रैली में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)
बनारस में हुई रैली में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कांग्रेस की चुनाव प्रचार अभियान समिति के प्रमुख पीएल पुनिया ने रविवार को कहा कि प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान का चेहरा होंगी। उन्होंने कहा कि प्रियंका राज्य में सबसे लोकप्रिय राजनीतिक शख्सियत हैं। वहीं हमारा एक चेहरा होंगी, जिनके इर्द-गिर्द पूरा चुनाव प्रचार अभियान चलेगा। पुनिया के इस जोश भरे बयान का क्या यह मतलब निकाला जाए कि प्रियंका गांधी के चुनाव में मुख्य चेहरा बनने से कांग्रेस को इसका फायदा होगा? सवाल यह भी है कि क्या जो काम 2017 में राहुल गांधी नहीं कर पाए 2022 में प्रियंका गांधी उसे पूरा कर सकेंगी। 
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कांग्रेस की यूपी में आखिरी बार सरकार 1985 से 1989 के बीच रही जब एनडी तिवारी कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे। तब से लेकर अब तक कांग्रेस यूपी में सत्ता से बाहर है और पार्टी का ग्राफ प्रदेश में गिरता ही जा रहा है।  पिछले चुनाव में राहुल गांधी ने चुनाव अभियान की बागडोर संभाली हुई थी और पार्टी ने 2017 का चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लड़ा था। इस चुनाव में पार्टी ने मुंह की खाई। उसका वोट शेयर 6.2 प्रतिशत था और सिर्फ सात सीटों पर संतोष करना पड़ा।  


राजनीति के जानकार बताते हैं कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुर्खियां जरूर बटोर ली हैं, लेकिन अभी कांग्रेस संगठन का जो हाल है उस आधार पर कोई चमत्कार का हो जाना या सरकार बनाने की हैसियत में आ जाने की बात हास्यास्पद लगती है। इतना जरूर है कि प्रियंका मायावती के वोट बैंक में कुछ सेंध लगा सकती है और पार्टी का वोट शेयर थोड़ा बढ़ सकता है। 
 
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