कानों देखी: प्रधानमंत्री ने योगी के कंधे पर रखा हाथ, देखिए कितना दूर चलते हैं साथ-साथ!

Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 23 Nov 2021 11:55 AM IST

सार

भले ही प्रधानमंत्री ने लाइव आकर कृषि कानून वापस लेने का एलान कर दिया हो, लेकिन किसान अभी झुकने को तैयार नहीं हैं। किसान अब गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी की मांग पर मुखर हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या मोदी जल्द ही टेनी के भविष्य का भी फैसला करेंगे? वहीं पिछले दिनों मोदी के साथ योगी की एक फोटो वायरल हुई, जिसके बाद सियासी गुणा भाग लगने शुरू हो गए। राजनीतिक गलियारों में इस फोटो के क्या निकाले जा रहे हैं मायने, कुछ ऐसी ही राजनीति की दिलचस्प खबरें जानने के लिए पढ़ें हमारा विशेष कॉलम कानों-देखी...
सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ पीएम नरेंद्र मोदी
सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ पीएम नरेंद्र मोदी - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के बाद जहां प्रधानमंत्री की फ्लीट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अकेला छोड़ दिया था, वहीं इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद प्रधानमंत्री ने इसे गंभीरता से भी लिया। बताते हैं कि प्रधानमंत्री को पीएमओ के एक अधिकारी ने बताया कि इसका संदेश बहुत खराब जा रहा है। दूसरे योगी आदित्यनाथ को भी यह पल काफी सता गया। फिर क्या था प्रधानमंत्री हर विपरीत हवा को पक्ष में मोड़ लेने की क्षमता से भरपूर हैं, उन्होंने लखनऊ के राजभवन में इसका हल निकाल लिया। योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट करके शानदार केमिस्ट्री का संकेत भी दे दिया, लेकिन लखनऊ के गोमती नगर, गौतमपल्ली, कालीदास मार्ग में घूमने वाले राजनीति के जानकार अभी इसे बहुत गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उनका कहना है कि ठीक दिखाने से सबकुछ ठीक नहीं हो जाएगा। भाजपा में अंदरखाने भी इसे लेकर काफी कुछ चल रहा है। उन्हें लग रहा है कि यह साथ भी कोई बहुत दिनों का नहीं है। 2022 का विधानसभा चुनाव बीतने दीजिए और सब पता चल जाएगा। कुल मिलाकर हो चाहे जो हो लेकिन एक बार फिर केशव प्रसाद मौर्या की बड़ी सक्रियता तारीफ के काबिल है।
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लालू के घर फिर मचा झगड़ा भारी

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के घर फिर भारी झगड़ा मच गया है। मां राबड़ी के लाडले लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप ने तेजस्वी के खिलाफ कमान संभाल रखी है। वह तेजस्वी यादव को निशाने पर लेने के साथ-साथ उनके करीबी संजय यादव को सार्वजनिक सभाओं में निशाने पर लेने लगे हैं। दिलचस्प है कि तेज प्रताप पर लालू प्रसाद यादव का कोई जोर नहीं चल पाता। राजद का हर नेता भी तमाम रूप धारण कर लेने वाले तेज प्रताप के कोप से अपनी डगर बचाकर चलता है। लालू की तबियत भी ठीक नहीं चल रही है। दूसरी तरफ बड़ी बेटी मीसा की राज्यसभा सदस्यता का कार्यकाल पूरा होने वाला है। मीसा इसे लेकर चिंतित हैं और राजनीति में अपनी मजबूती बनाए रखना चाहती हैं। दूसरी बेटी ने भी राजनीति में अपनी हिस्सेदारी की मांग तेज कर दी है। दूसरी तरफ तेज प्रताप को मां राबड़ी देवी का आशीर्वाद प्राप्त है। अब ऐसे में न तो लालू के पास कुछ करने का दम बचा है और न ही तेजस्वी के पास भाई से जूझने की ताकत।

गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी का क्या होगा?

किसान संगठन केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा, टेनी का इस्तीफा मांग रहे हैं। वह चाहते हैं कि प्रधानमंत्री लखीमपुर खीरी हिंसा के मामले में आई रिपोर्ट को संज्ञान में लेकर टेनी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करें। किसान संगठनों की इस मांग पर भाजपा के नेताओं ने मौन साध लिया है। हालांकि प्रधानमंत्री ने भी इसे लेकर एक संदेश देने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री ने डीजीपी सम्मेलन में हुई सामूहिक फोटोग्राफी में हिस्सा लिया। इसमें दोनों गृह मंत्री और दोनों राज्यमंत्री भी मौजूद हैं, लकिन अजय मिश्रा टेनी गायब हैं। बताते हैं कि सम्मेलन में टेनी की मौजूदगी भी न के बराबर रही। वह कुछ देर के लिए इसमें शरीक हुए थे। माना जा रहा है कि सामूहिक फोटोग्राफ से भी उन्हें दूर रहने का संदेश दे दिया गया था। संसद का शीतकालीन सत्र भी शुरू हो रहा है। इसमें तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का मसौदा पेश होना है। जाहिर है कि इस मसौदे को दोनों सदनों की मंजूरी दिलाने के लिए सरकार को सदन में चर्चा भी करानी पड़ेगी। इस दौरान लखीमपुर खीरी प्रकरण का उठना भी तय है और विपक्ष अजय मिश्रा टेनी को मंत्रिमंडल से हटाने का दबाव भी बना सकता है। दूसरी तरफ एक खबर और है। पिछले कुछ समय से टेनी भी अपने गृहनगर और कर्म क्षेत्र में ही अधिक देखे जा रहे हैं।

अपनों ने ही खड़ी कर रखी है मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की 'खाट'

छोटे भाई बसंत सोरेन से जहां झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नाराज हैं, वहीं उन्हें विरोधियों के बजाय अपनों से ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हेमंत सोरेन राजनीति में अपने पिता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन की राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन उनके बड़े भाई स्व. दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन और सीता सोरेन की बेटी ने परिवार को झटका देना शुरू कर दिया है। सीता सोरेन एक तरह से बगावत पर उतारू हैं। अब तो वे खुलकर कहने लगी हैं कि झामुमो का नेतृत्व बेइमानों के हाथ में चला गया है। सीता सोरेन के साथ-साथ बसंत सोरेन की सुन लीजिए। बसंत ने अपनी ब्याहता पत्नी के रहते दूसरी शादी कर ली है। उनके इस कदम से हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी भी इत्तेफाक नहीं रखतीं, लेकिन बसंत अपनी अलग राह लेकर चल रहे हैं। जहां तक बात हेमंत सोरेन की है, वे सभी को साथ लेकर चलते हैं। उन्हें माता-पिता का भी आशीर्वाद प्राप्त है, लेकिन इसी के साथ झामुमो के विभाजन का भी खतरा बरकरार है।

चाचा शिवपाल भी करीब-करीब तैयार

राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी के सामने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने काफी कुछ खुलकर कह दिया है। साथ में जयंत के लिए एक संदेश भी कि साथ आना हो, तो इधर-उधर की तांक-झांक बंद होनी चाहिए। राष्ट्रीय लोकदल के सूत्र कहते हैं कि समझौता समाजवादी और रालोद में ही होगा, लेकिन मोलभाव की राजनीति यदि न हो तो सस्ते में काम निपट जाता है। दरअसल हो यह रहा है कि जयंत चौधरी कभी दीपेंद्र हुड्डा के साथ दोस्ती का रंग दिखाने लगते हैं तो कभी भाजपा के नजदीक जाने वाले सूत्रों से संवाद की खबरें आने लगती हैं। अखिलेश के एक रणनीतिकार कहते हैं कि अब यह तय जयंत को ही करना है। मुझे लग रहा है कि वह सबकुछ टटोल चुके हैं और अब एक-दो सप्ताह में सब तय हो जाएगा। बताते हैं 20-23 सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश में और तीन-चार दूसरे हिस्से में रालोद को देने पर सहमति बन सकती है।

दूसरी खबर चाचा शिवपाल सिंह यादव को लेकर है। अखिलेश यादव ने पिता मुलायम सिंह यादव को उनके जन्मदिन पर चचा को सम्मान देने का वादा कर लिया है। बताया जा रहा है कि चाचा के पास भी कोई दूसरा बड़ा चारा नहीं है। इसलिए वह भी भतीजे के साथ समाजवादी पार्टी को मजबूत बनाने की तैयारी कर रहे हैं। सूचना आ रही है कि शिवपाल अपने छह-सात पसंद के उम्मीदवार उतार सकते हैं।

सोनिया गांधी ने ले ली राहत की सांस!

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार के बाद राहत की सांस ले ली है। राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और युवा नेता सचिन पायलट भी करीब-करीब खुश हैं। पायलट पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही दिल्ली से जयपुर के लिए रवाना हुए थे। बताते हैं रविवार सुबह तक अशोक गहलोत ने अपने जादूगरी अंदाज से थोड़ा बाजी पलटनी चाही, लेकिन राजस्थान के प्रभारी अजय माकन समेत कुछ नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष की सलाह को ही सर्वोपरि रखा। अब बारी सचिन पायलट की ताजपोशी की है। सुनने में आ रहा है कि जल्द ही वह भी राजस्थान में पार्टी की कमान थाम लेंगे। इस तरह से राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 के पहले राज्य में सबकुछ ठीकठाक चलने की उम्मीद बढ़ गई है।

राजस्थान के साथ-साथ पंजाब से भी कांग्रेस अध्यक्ष के पास अच्छी खबर आ रही है। मुख्यमंत्री चन्नी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। वह 2022 में विधानसभा चुनाव को देखकर फैसले ले रहे हैं। थोड़ी-बहुत चिंता केवल पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू की राजनीतिक शैली को लेकर है।

उत्तर प्रदेश चुनाव के अंत में तगड़ी इंट्री लेंगे प्रधानमंत्री मोदी!

जुलाई में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे और नेतृत्व में लड़े जाने का भाजपा ने मन बनाया था, लेकिन मंथन के बाद भाजपा ने कई अहम बदलाव किए हैं। बताते हैं यह बदलाव अगस्त, सितंबर और अक्तूबर के तीन महीनों में जनता का रुख देखने के बाद हुआ है। अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही लड़े जाने की योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब साथ में मंच साझा करेंगे। इस रणनीति को आगे करने के लिए भाजपा ने चुनाव प्रचार की रणनीति में केंद्रीय नेताओं की भागीदारी भी बढ़ा दी है। सूत्र तो यह भी कहते हैं कि तीन दिन तक उत्तर प्रदेश को लगातार समय देकर दिल्ली लौटे प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाबत व्यापक समय देने के लिए हामी भर दी है। इसका एक अर्थ यह भी लगाया जा रहा है कि 2022 में चुनाव के बाद की स्थिति पर भी कई फैसले हो सकते हैं।
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