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Amit Shah: शाह के तीसरे रामबाण ने तैयार की भगवा को क्लीन स्विप दिलाने की राह, कश्मीर में खिलेगा ‘कमल’

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 04 Oct 2022 06:52 PM IST
सार

Amit Shah: शाह ने कहा, कुछ लोग नहीं चाहते थे कि इस क्षेत्र में शांति बनी रहे। इसके लिए उन्होंने गुज्जर-बकरवाल को उकसाना शुरू कर दिया। ये भ्रम फैलाया गया कि पहाड़ी समुदाय के आने से उनका हिस्सा कम हो जाएगा। गृह मंत्री ने कहा, 'मैं कहता हूं, पहाड़ी भी आएंगे और गुर्जर-बकरवाल का हिस्सा कम नहीं होगा...

Amit Shah in Jammu Kashmir
Amit Shah in Jammu Kashmir - फोटो : Agency
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विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले ही भाजपा के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार कर दिया है। शाह की इस रणनीति से जहां एक ओर नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस पार्टी को तगड़ा झटका लगेगा, वहीं भाजपा की सीटों का ग्राफ 40 के पार जा सकता है। शाह ने कहा, जस्टिस जीडी शर्मा कमीशन ने पहाड़ी, गुज्जर और बकरवाल समुदाय को आरक्षण देने की सिफारिश की है। प्रधानमंत्री मोदी का मन है कि प्रशासनिक कार्य पूरा कर इस सिफारिश को जल्द से जल्द लागू किया जाए।



गुर्जर, बकरवाल और पहाड़ियों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। शाह ने कहा, कुछ लोग नहीं चाहते थे कि इस क्षेत्र में शांति बनी रहे। इसके लिए उन्होंने गुज्जर-बकरवाल को उकसाना शुरू कर दिया। ये भ्रम फैलाया गया कि पहाड़ी समुदाय के आने से उनका हिस्सा कम हो जाएगा। गृह मंत्री ने कहा, 'मैं कहता हूं, पहाड़ी भी आएंगे और गुर्जर-बकरवाल का हिस्सा कम नहीं होगा। पहाड़ी समुदाय के लिए आरक्षण का वादा कर शाह ने जम्मू से भाजपा को क्लीन स्वीप करने की राह दिखा दी है।

शाह के तीन बाण, जिन्होंने भाजपा को दी मजबूती

अमित शाह के तीसरे रामबाण ने जम्मू में जहां भाजपा की जीत पुख्ता की है, वहीं कश्मीर में 'भगवा' को फायदा दिलाने का रास्ता बना दिया है। इससे पहले जम्मू कश्मीर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट में नौ सीटें अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए आरक्षित की गई थीं। गुज्जर मुस्लिम समुदाय के गुलाम अली को राज्यसभा में भेजना, भाजपा की चुनावी रणनीति का ही एक हिस्सा है। जम्मू-कश्मीर की राजनीति एवं सुरक्षा मामलों के जानकार कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) बताते हैं, यदि पहाड़ियों को एसटी का दर्जा मिल जाता है तो वह फैक्टर पूरे जम्मू-कश्मीर में भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए काफी है। राजौरी, पुंछ व अनंतनाग सहित करीब दर्जनभर क्षेत्रों में इस वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। भाजपा को शाह की घोषणा से इतनी ही विधानसभा सीटों पर लाभ मिल सकता है। पार्टी ने जब गुलाम अली को राज्यसभा में भेजा, तब भाजपा का ग्राफ 35 से 40 सीटों तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई थी। अब वह संख्या इस आंकड़े को पार कर सकती है।

...तो इसलिए भाजपा का पलड़ा हो रहा है भारी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राजौरी की एक जनसभा में जम्मू-कश्मीर के गुर्जर, बक्करवाल और पहाड़ी समुदायों को आरक्षण देने का वादा कर दिया है। अभी तक इन समुदायों के लोग, नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस से जुड़े रहे थे। अब आरक्षण का लाभ मिलने के बाद ये समुदाय, भाजपा को समर्थन दे सकते हैं। बतौर अनिल गौर, देखिये मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में भाजपा का पलड़ा भारी होता जा रहा है। वजह, नेशनल कांफ्रेंस का वजूद अब पहले जैसा नहीं रहा। बीसीसीआई के 113 करोड़ रुपये के घोटाले में अभी फारुख अब्दुल्ला को क्लीन चिट नहीं मिली है। ईडी ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में चार्जशीट दाखिल की है। फारुख अब्दुल्ला से जांच एजेंसी कई बार पूछताछ कर चुकी है। चुनाव से पहले फारुख अब्दुल्ला की गिरफ्तारी भी संभव है।

पीडीपी और कांग्रेस में लगी है सेंध

महबूबा की पार्टी के अधिकांश बड़े नेता किसी दूसरे दल में शामिल हो गए हैं। ऐसे में पीडीपी का कोई खास भविष्य नजर नहीं आता। कांग्रेस पार्टी भी भंवर में है। गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी का गठन कर लिया है। ऐसे में वे भी कांग्रेस के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाने की तैयारी कर रहे हैं। पूर्व डिप्टी सीएम सहित अनेक वरिष्ठ राजनेताओं ने उनकी पार्टी ज्वाइन की है। इनमें कई पूर्व मंत्री और विधायक रहे नेता भी शामिल हैं। अगर गुलाम नबी आजाद की डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी (डीएपी) पांच-सात सीट लेने में कामयाब हो जाती है तो वह कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ा नुकसान साबित होगा। दूसरी ओर, गुलाम नबी की पीएम मोदी के साथ नजदीकियां हैं। राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि अगर उनकी पार्टी कुछ खास नहीं कर सकीं, तो वे कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरह अपनी पार्टी का भाजपा में विलय करने जैसा कोई कदम उठा सकते हैं।

भाजपा ने तीनों पार्टियों से छीना वोटरों का बड़ा हिस्सा

अमित शाह ने आरक्षण की बात कह कर इन तीनों पार्टियों से वोटों का एक बड़ा हिस्सा छीन लिया है। चूंकि एसटी आबादी तो पूरे जम्मू कश्मीर में है, इसलिए भाजपा को आरक्षण की घोषणा करने का फायदा श्रीनगर के कई क्षेत्रों में भी मिलेगा। राजौरी और पुंछ में गुर्जर बक्करवाल समुदाय के लोगों की बड़ी संख्या है। जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट में नौ सीटें अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए आरक्षित की गई हैं। इनमें से छह सीटें जम्मू में, तो तीन सीटें कश्मीर में हैं। भाजपा द्वारा गुलाम अली को राज्यसभा में भेजने के पीछे इन्हीं समुदायों का समर्थन हासिल करना रहा है। पुंछ एवं राजौरी इलाके, जम्मू संभाग के अंतर्गत आते हैं। यहां पर गुर्जर मुस्लिम एवं बक्करवाल बड़ी तादाद में रहते हैं। अभी तक यहां के लोगों को कोई खास पहचान नहीं मिली थी।

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40 से अधिक सीटों पर कब्जा कर सकती है भाजपा

तीन दशक के बाद अब इन लोगों को विधानसभा में प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है। पुंछ और राजौरी में अब एसटी समुदाय के लिए पांच सीट आरक्षित हो गई हैं। इनकी संख्या 14 लाख से अधिक है। गुलाम अली का राज्यसभा में पहुंचना, विधानसभा सीट आरक्षित होना और अब केंद्रीय मंत्री शाह की आरक्षण देने की घोषणा, भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक फायदा साबित हो सकती है। पहले भाजपा की पहुंच 32 सीटों के आसपास रही है। 2014 के विधानसभा चुनाव में पीडीपी को 28 और भाजपा को 25 सीटें मिली थीं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 15, कांग्रेस 12 और अन्य के खाते में 9 सीटें गई थीं। अब भाजपा को 40 से अधिक सीट मिल सकती हैं। कांग्रेस व एनसी के नेता भाजपा में शामिल हो रहे हैं।

विधानसभा में जाने के अवसर के साथ ये भी मिला है ...

नए परिसीमन में विधानसभा में सीटों की संख्या 90 हो गई है। कश्मीर संभाग में 47 तो जम्मू संभाग में 43 सीटें हैं। अनुसूचित जाति के लिए 7 तो वहीं अनुसूचित जनजाति के लिए 9 सीट रिजर्व की गई हैं। अभी तक राजनीति एवं विकास के मामले में इस समुदाय को दरकिनार किया जाता रहा। अनिल गौर के अनुसार, ये पहाड़ी लोग हैं। इन्हें खानाबदोश की तरह रहना और चलना होता है। पहाड़ों में जंगलों के बीच रहे इन लोगों को पहले वन अधिनियम के तहत अधिकार भी नहीं मिला था। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद सरकार ने इनकी सुध ली है। अब ये लोग नौकरी में भी आ रहे हैं। राज्य में आरक्षण मिला है। 2021 में गुर्जर, बक्करवाल और गद्दी-सिप्पी समुदायों के लाभार्थियों को वनाधिकर अधिनियम 2006 के तहत वन संपदा पर निजी व सामुदायिक अधिकार का प्रमाणपत्र सौंपा गया। सरकार के इस फैसले ने गुर्जर, बकरवाल व गद्दी-सिप्पी सहित 14 लाख लोगों को विकास का सुनहरी अवसर प्रदान किया है। ये लोग दशकों से जंगलों में बिना किसी अधिकार के रहते आए थे। अब इनकी शिक्षा एवं साक्षरता का स्तर बढ़ाने की योजना शुरू की गई है।

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