पुंछ और राजोरी को फिर से आतंकवाद की आग में धकेलने के मंसबों को अंमली जामा पहनने में जुटे आतंकी संगठन और आई एस आई

Jammu and Kashmir Bureau जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Wed, 13 Oct 2021 12:54 AM IST
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पुंछ। 19 वर्षों से आतंकवाद मुक्त पुंछ एवं राजोरी जिलों को एक बार फिर से आतंकवाद की आग में धकेलने की साजिश रची जा रही है। कुछ वर्षों से नियंत्रण रेखा के उस पार बड़े पैमाने पर साजिश रची जा रही है। इसे अमली जामा पहनाने में उस पार पीओके में मौजूद आतंकी संगठन और आईएसआई पूरी तरह से जुटी हुई है। इसका प्रमाण राजोरी की थन्नामंडी तहसील में दो माह से आतंकियों की मौजूदगी है।
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हालांकि क्षेत्र में मौजूद आतंकियों के इस दल के तीन साथी दो मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं। बावजूद उसके बचे आतंकी अभी भी उसी क्षेत्र में मौजूद हैं। इससे पहले कुछ वर्षों से यह देखा गया है कि नियंत्रण रेखा के उस पार से सफलता पूर्वक घुसपैठ करने के बाद आतंकी इस क्षेत्र में एक या दो दिन से अधिक न रुक कर कश्मीर की तरफ चले जाते थे, लेकिन वर्षों बाद अपने तीन साथियों को गंवाने के बाद भी आतंकियों का क्षेत्र से कहीं न जाना इस बात को दर्शाता है कि यह आतंकी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दिखा कर क्षेत्र से आतंकवाद के सफाए के बाद मन बदल चुके अथवा खामोश हो चुके आतंकवाद के समर्थकों के दिलों में फिर से दबे हुए अरमानों को जगाकर उन्हें अपने सहयोग में तैयार करना है। ताकि एक दशक से अधिक समय तक आतंकवादियों के गढ़ रही पुंछ की सुरनकोट तहसील और राजोरी की थन्नामंडी तहसील को फिर से पहले जैसा आतंक का माहौल बनाया जा सके, जिससे कश्मीर में आतंकवाद के सफाए में जुटे सुरक्षा बलों एवं खुफिया एजेंसियों का ध्यान दो तरफ बांटा जा सके। इससे कश्मीर में आतंकियों पर बन रहे दबाव पर भी असर पड़ेगा और राजोरी पुंछ में आतंकवाद पनपने से कश्मीर में दबाव बनने पर इन वहां से इन क्षेत्रों में आतंकियों के भाग आने से उन्हें हर तरह से यहां मौजूद आतंकियों का सहयोग मिलेगा। क्योंकि वर्ष 2002 के पूर्व यह क्षेत्र ऐसे थे जहां आतंकियों को पूरी तरह बोल बाला था और वह हर तरह से अपनी मन मर्जी करते थे।

करीब करीब हर गांव में दर्जन भर आतंकी मौजूद रहते थे और कई थानों पर आतंकी वॉलीबाल, फुटबाल क्रिकेट आदि खेला करते थे। थान्नामंडी देरागली पर कई वर्षों तक बिना सुरक्षा के गाड़ियों का गुजरना तक बंद हो गया था। इसके बाद सुरक्षा बलों ने कड़े प्रयास और कई जवानों की शहादत के बाद सैकड़ों आतंकियों को मौत के घाट उतार सुरक्षा बलों इन क्षेत्रों से आतंकियों का सफाया कर यहां अमन स्थापित किया था। इसके बाद जम्मू संभाग में पाकिस्तान में मौजूद आतंकी सरगनाओं और आईएसआई को काफी बड़ा झटका लगा था। क्योंकि कभी उस पार मौजूद आतंकी सरगना, आईएसआई और पाकिस्तानी सेना इस बात के सपने देखती थी कि इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियों का संचालन करने वाले आतंकी संगठनों लश्कर-ए- तोइबा, जैश-ए-मोहमद, हिजबुल मुजाहिदीन, हिजबुल मुजाहिदीन पीर पांचाल रेजिमेंट, तहरीक उल जेहाद इस्लामी जैसे संगठनों के सहयोग से वह पुंछ एवं राजोरी जिलों को जिनको पाकिस्तानी सेना 1947 में कब्जाने में नाकाम रही थी।
इन जिलों को कब्जा लेगी, लेकिन सुरक्षा बलों ने कुछ ही साल में उन आतंकी संगठनों का इस प्रकार सफाया कर दिया कि यहां पर उनका नाम लेने वाला भी कोई नहीं बचा। ऐसे में पुंछ एवं राजोरी में फिर से आतंकवाद को जिंदा करने के लिए उस पार से हथियारों और ड्रग्स की तस्करी से जहां कुछ ओजीडब्ल्यू को सक्रिय करने का काम किया गया है। वहीं आतंकियों को क्षेत्र में मौजूद रख कर आतंकी गतिविधियों को संचालित कराने का प्रयास राजोरी, पुंछ को आतंकवाद की आग में धकेलने का प्रयास है।

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