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गृहमंत्री का राजोरी दोरा पुंछ के ग्रामीणा के लिए बना परेशानियों का सबब

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पुंछ। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का राजोरी दौरा जहां कई लोगों के लिए उमीदों भरा रहा, वहीं पुंछ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए कापी परेशानियों का सबब बना रहा। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को कई किलोमीटर पैदल आवाजाही करने के बाद गंतव्यों अथवा जरूरी कार्यों के लिए पहुंचना पड़ा। क्योंकि जिले में लंबी दूरी के साथ जिले के भीतर चलने वाले वाहन सड़कों से गायब रहे। जिले से हजारों पहाड़ी भाषियों के गृहमंत्री अमित शाह की रैली में जाने के लिए प्रशासन के सहयोग से जिले में चलने वाली सैकड़ों बसें एवं मेटाडोर बुक कर राजोरी ले जाएगी गई थी।

ऐसे में जिला मुख्यालय से मंडी, मेंढर, सुरनकोट तहसील मुख्यालयों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों को चलने वाले सभी प्रकार के यात्री वाहन उपलब्ध नहीं थे। इसके कारण लोगों को दिन भर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों को दिन भर पैदल आवाजाही करते देखा गया। इतना ही नहीं जिला मुख्यालय से तहसील मुख्यालयों की तरफ जाने वाले सैकड़ों लोग भी दिन भर बस अड्डे पर घंटों वाहनों के इंतजार में भटकते नजर आए।

सुबह होते ही गूंजने लगे पहाड़ी एकता जिंदाबाद के नारे
संवाद न्यूज एजेंसी
पुंछ। राजोरी में मंगलवार को हुई केंद्रीय गृहमंत्री की रैली को लेकर जिले में पहाड़ी भाषियों में भारी उत्साह देखने को मिला। सुबह होते यहां पहाड़ी एकता जिंदाबाद के नारे गूंजने लगे। रैली में जाने के लिए एक तरफ जहां सार्वजनिक एवं निजी वाहनों की कतारें लगी रहीं। वहीं पुंछ से राजोरी तक हर तरह पहाड़ी एकता जिंदाबाद पहाड़ी के नारे गूंजते रहे।
गौरतलब है कि अमित शाह की रैली को लेकर डेढ़ माह से पहाड़ी भाषियों में उत्साह का माहौल था। इसके चलते पहाड़ियों की तरफ से रैली को सफल बनाने के लिए जी जान से अभियान चलाया जा रहा था। ऐसे में मंगलवार सुबह से पुंछ नगर, मंडी सुरनकोट और मेंढर कस्बाें के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पहाड़ी भाषी अपनी पहाड़ी पारंपरिक रंग बिरंगी पगड़ियां सिरों पर लगाकर वाहनों में सवार होकर राजोरी के लिए निकालने लगे थे। यह क्रम सुबह नौ बजे तक जारी रहा। जहां पहाड़ियों के काफिले राजोरी की तरफ कूच कर रहे थे, और हर कोई यही नारे लगा रहा था। पहाड़ी एकता जिंदाबाद, पहाड़ी कबीला जिंदाबाद और हमें क्या चाहिए जनजाति का दर्जा। पुंछ से शुरू हुए इन नारों की राजोरी तक रास्ते भर में गूंज सुनाई दे रही थी। हजारों की संख्या में पहाड़ी कर्मचारी, व्यवसायिक, नौजवान, बुजुर्ग पूरे उत्साह के साथ रैली में भाग लेने के लिए आगे बढ़ रहे थे।

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