पुंछ जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने से डोकों से लोट रहे बक्करवाल बीच रास्ते में फंसे,परेशानियों का सामना

Jammu and Kashmir Bureau जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Sat, 16 Oct 2021 12:06 AM IST
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पुंछ। मेंढर में पुंछ-जम्मू राष्ट्रीय पर भाटादूड़ियां में आतंकियों द्वारा सेना के जवानों पर हमला किए जाने के बाद सुरक्षा कारणों को देखते हुए वीरवार देर शाम से पुंछ-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर जड़ांवाली गली से बींबरगली के बीच सभी प्रकार के वाहनों और पैदल आवाजाही बंद कर दी गई। इससे जहां शुक्रवार दिन भर यह 19 किलोमीटर लंबे मार्ग पर किसी प्रकार का यात्री वाहन अथवा पैदल आता जाता नजर नहीं आया। केवल सैन्य एवं पुलिस वाहन और जवान ही आते जाते नजर आते रहे।
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इस दौरान भाटादूड़ियां बाजार भी पूरी तरह बंद रहा। पुंछ जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवाजाही बंद किए जाने से जहां मार्ग पर यात्रा करने वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ बड़ी संख्या में पुंछ से जम्मू जाने वालों को अपना यात्रा का कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। वहीं मार्ग बंद होने से सबसे अधिक परेशानियों का सामना करीब सात माह बाद अपने परिवार एवं माल मवेशियों के साथ ढोकों से घरों को लौट रहे बक्करवालों को करना पड़ा जिन्हें कल शाम से ही सुरक्षा बलों द्वारा क्षेत्र में रोक कर रखा हुआ है। बीच रास्ते में फंसे बक्करवालों के साथ जब बात की गई तो उनके सदस्यों मोहम्मद दीन, वजीर हुसैन और मोहम्मद कासिम ने बताया कि वीरवार शाम छह बजे के करीब हम लोग बच्चों और पचास के करीब बकरी के नवजात बच्चों के साथ यहां भाटा दूड़ियां में पहुंचे। तब तक हमारी भेड़ बकरियां बींबर गली तक पहुंच गई थीं। जैसे ही हम यहां पहुंचे तो हमें यहीं रोक दिया गया। क्योंकि आगे गोलीबारी हो रही थी।

उसके बाद आज दूसरी शाम हो गई है।हम यहां फंसे हुए हैं हमारे पास केवल कल रात का खाना पकाने तक का ही राशन था, क्योंकि आज हमें सुबह तक राजोरी में घर पहुंच जाना था, लेकिन कल रात को हमने खाना खा लिया आज दिन भर हम और हमारे बच्चे भूखे रहे। यहां जंगल में कुछ भी खाने पीने के लिए नहीं मिल रहा है। आसपास की जो दुकानें हैं वह भी बंद हैं। जहां हमारे भूखे बच्चे हमारे लिए परेशानियों का कारण बन रहे हैं। वहीं हमें सबसे बड़ी चिंता हमारे साथ मौजूद बकरियों के पचास के करीब नवजात बच्चे हैं जो अभी केवल बकरियों का दूध ही पी सकते हैं अब यह बच्चे यहां हैं तो बकरियां काफी दूर हैं ऐसे में हमें इन बकरियों के बच्चों के भूख से मर जाने का डर सता रहा हैं।
बुजुर्ग मोहम्मद दीन का कहना हैकि हमें इस मार्ग से भेड़ बकरियों के साथ डोकों को आते जाते 55 से भी अधिक वर्ष हो गए हैं ऐसे कभी हमें यहां रोका नहीं गया है जैसा इस बार रोका गया है।

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