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DGP Jail Lohia Murder: घरेलू नौकर यासिर पर आरोप, क्षत-विक्षत मिला डीजी लोहिया का शव

अमर उजाला नेटवर्क, दोमाना Published by: विमल शर्मा Updated Tue, 04 Oct 2022 08:58 AM IST
सार

शहर के उदयवाला में डीजीपी जेल हेमंत कुमार लोहिया की हत्या किए जाने से क्षेत्र में अफरा तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। इस वारदात के बारे में जिसने भी सुना वह मौके पर पहुंच गया। हत्या को लेकर पुलिस के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और मामले में जांच शुरू कर दी।

डीजीपी जेल लोहिया की हत्या के बाद अस्पताल पहुंची पुलिस
डीजीपी जेल लोहिया की हत्या के बाद अस्पताल पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

डीजीपी हेमंत कुमार लोहिया की हत्या बेहद बेरहमी से की गई। हत्यारे ने न सिर्फ डीजीपी का गला रेता बल्कि कांच की टूटी बोतल से पेट और बाजू पर कई वार किए। मौके पर डीजीपी के लहूलुहान शव से पेट की आंतें भी बाहर निकली हुई मिलीं। हत्यारा यहीं नहीं रुका, उसने शरीर पर केरोसिन छिड़क कर जलाने की भी कोशिश की। डीजीपी के सिर पर तकिया और कपड़े डालकर ऊपर से आग लगा दी थी।



शहर के उदयवाला में डीजीपी जेल हेमंत कुमार लोहिया की हत्या किए जाने से क्षेत्र में अफरा तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। इस वारदात के बारे में जिसने भी सुना वह मौके पर पहुंच गया। हत्या को लेकर पुलिस के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और मामले में जांच शुरू कर दी।


सोमवार की रात को डीजीपी जेल हेमंत कुमार लोहिया की उदयवाला में हत्या कर दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस के अधिकारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे क्षेत्र को घेर लिया। इस वारदात की सूचना जैसे-जैसे लोगों को मिली तो मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।

हर कोई इस बारे में पूरी जानकारी हासिल करना चाहता था और एक दूसरे से इस बाबत बात करने लगा। मौके पर लोगों का हुजूम जमा हो गया। उधर पुलिस ने पूरे क्षेत्र की घेरा बंदी कर रखी थी।

लोगों को यह भी अहसास हो रहा था कि इन दिनों गृह मंत्री अमित शाह प्रदेश के दौरे पर हैं और मंगलवार को उनकी राजोरी में रैली होनी है। ऐसे पूरे प्रदेश को अलर्ट पर रखा हुआ है। इतनी टाइट सिक्योरिटी के बीच बदमाशों ने इस तरह की वारदात को अंजाम दिया है।

एडीजीपी को की कॉल, नहीं उठी तो मैसेज भेजकर किया सूचित

घटना के बाद डीजीपी के दोस्त संजीव खजूरिया ने बताया कि विचलित कर देने वाली वारदात के बारे में सूचना देने के लिए उन्होंने सबसे पहले एडीजीपी मुकेश सिंह को फोन किया। कॉल कट हो गई तो एडीजीपी ने मैसेज भेजकर व्यस्त होने की बात कही।

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इसके बाद संजीव खजूरिया ने मैसेज भेजकर घटना की सूचना दी। जिसके बाद एडीजीपी ने फोन कर पूरी जानकारी ली और पीसीआर से टीम मौके पर भेजी। देर रात एडीजीपी मुकेश सिंह, एडीजीपी आलोक कुमार, डीआईजी विवेक गुप्ता समेत अन्य आला अफसर भी मौके पर पहुंच गए।

अगले डीजीपी की रेस में सबसे आगे थे लोहिया

डीजीपी जेल विभाग हेमंत कुमार लोहिया 3 अगस्त 2022 को जम्मू कश्मीर में डेपुटेशन से लौट कर आए थे। हालांकि उनको सितंबर 2023 में वापस आना था। सूत्रों का कहना है कि वह जम्मू कश्मीर के नए डीजीपी की रेस मे सबसे आगे थे। इसलिए उनको एक साल पहले ही डेपुटेशन से वापस बुलाया गया। जांच का एक पहलू यह भी है।

सूत्रों का कहना है कि डीजीपी लोहिया की हत्या करने वाला हेल्पर यासिर पहले भी कई पुलिस अफसरों के साथ काम कर चुका है। हेमंत कुमार लोहिया 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, जो असम के रहने वाले थे। जम्मू से डेपुटेशन पर जाने से पहले वह पुलिस मुख्यालय में आईजी टेक्निकल थे।

डेपुटेशन से लौटने के बाद उनको होमगार्ड सिविल डिफेंस का डायरेक्टर जनरल बनाया गया था। अभी डेढ़ महीना पहले ही उन्हें जेल विभाग का डीजीपी बनाया गया था। उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर में डीजीपी के पद का इतिहास रहा है कि जो कोई भी जेल विभाग का डीजीपी रहा है, उसे डीजीपी बनाया गया है। इसमें पूर्व के डीजीपी दिलबाग सिंह, एसपी वैद, एस के मिश्रा, के राजिंदरा आदि डीजी जेल से डीजीपी बने। 

शाम 5 बजे करीबियों से जय माता दी बोल रहे थे

जानकारी के अनुसार सोमवार की शाम 4.48 मिनट पर एच के लोहिया ने अपने करीबियों को दुर्गा अष्टमी का व्हाटसएप पर संदेश भी भेजा। वह श्रीनगर से 3 दिन पहले ही जम्मू लौटे थे। हेमंत लोहिया जम्मू कश्मीर पुलिस के एक मात्र सीनियर आईपीएस अफसर हैं, जो हर रोज अपने करीबियों को व्हाटसएप पर किसी न किसी तरह का संदेश भेज कर उनके संपर्क में रहना पसंद करते थे। 

सीनियर कैडर में 7वां नंबर

मौजूदा समय में जम्मू कश्मीर में तैनात आईपीएस अफसरों में वरिष्ठता के मामले में लोहिया सातवें नंबर पर थे। उनके आगे आईपीएस एस एम सहाय, दिलबाग सिंह, लालतेंदु मोहंती, बी श्रीनिवास, आर आर स्वैन, एक के चौधरी ही थे। 

लोहिया के साथ श्रीनगर से आया था यासिर

सूत्रों का कहना है कि जिस नौकर यासिर ने लोहिया की हत्या की है, वह कुछ दिन पहले ही श्रीनगर से जम्मू लौटा था। क्योंकि दरबार मूव के साथ लोहिया भी श्रीनगर चले गए थे। यहां यासिर उनके साथ हेल्पर के तौर पर काम करता था। कुछ दिन पहले जब लोहिया जम्मू आए तो यासिर भी उनके साथ जम्मू वापस आ गया।

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