प्रेम किशोर 'पटाखा' की हास्य कविता: रंगीन सपनों का रजिस्ट्रेशन 

प्रेम किशोर 'पटाखा' की हास्य कविता: रंगीन सपनों का रजिस्ट्रेशन
                
                                                             
                            कुछ होते हैं सपने रंगीन 
                                                                     
                            
तो कुछ हसीन 
कुछ सपने देखते नहीं 
दिखाते हैं
सपनों ही सपनों में 
आपको झुलाते हैं। 

मंच पर आते ही वे 
फूल मालाओं से लद गए 
आगे-पीछे दाएं- बाएं 
चमचों से बंध गए  आगे पढ़ें

1 month ago

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