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काव्य कैफे में अर्पण खोसला की हास्य व्यंग्य की कविता- पापा कहते हैं कि...

इरशाद

काव्य कैफे में अर्पण खोसला की हास्य व्यंग्य की कविता- पापा कहते हैं कि...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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पापा कहते हैं कि ज़िंदगी को खेल ना समझ 
तेरी नौकरी अच्छी है इसे जेल ना समझ 

और मर्द की चूड़ियां तो दफ़्तर की हथकड़ियां हैं 
इसलिए सपनों के सबैटिकल को तू अपनी बेल ना समझ 

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