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केदारनाथ सिंह: होंठों को हर शाम चाहिए ही चाहिए एक जलता हुआ सच

इरशाद

केदारनाथ सिंह: होंठों को हर शाम चाहिए ही चाहिए एक जलता हुआ सच

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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हर सुबह
होंठों को चाहिए कोई एक नाम
यानी एक ख़ूब लाल और गाढ़ा-सा शहद
जो सिर्फ़ मनुष्य की देह से टपकता है

कई बार
देह से अलग
जीना चाहते हैं होंठ
वे थरथराना-छटपटाना चाहते हैं
देह से अलग
फिर यह जानकर
कि यह संभव नहीं
वे पी लेते हैं अपना सारा गुस्सा
और गुनगुनाने लगते हैं
अपनी जगह आगे पढ़ें

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