Gorakh Pandey Poetry: वे कभी कभी कानून भंग करते हैं पर भले लोग हैं, ईश्वर से डरते हैं

गोरख पांडेय
                
                                                             
                            जो हैं गरीब उनकी जरूरतें कम हैं
                                                                     
                            
कम हैं जरूरतें तो मुसीबतें कम हैं
हम मिल-जुल के गाते गरीबों की महिमा
हम महज अमीरों के तो गम ही गम हैं

वे नंगे रहते हैं बड़े मजे में
वे भूखों रह लेते हैं बड़े मजे में
हमको कपड़ों पर और चाहिए कपड़े
खाते-खाते अपनी नाकों में दम है

वे कभी कभी कानून भंग करते हैं
पर भले लोग हैं, ईश्वर से डरते हैं
जिसमें श्रद्धा या निष्ठा नहीं बची है
वह पशुओं से भी नीचा और अधम है आगे पढ़ें

3 months ago

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