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Hindi Kavita: नरेश सक्सेना की कविता 'कोई-कोई वृक्ष बिल्कुल मनुष्यों की तरह होते हैं'

naresh saxena hindi kavita koi koi vriksh bilkul manushyon ki tarah hote hain
                
                                                                                 
                            

कोई-कोई वृक्ष


बिल्कुल मनुष्यों की तरह होते हैं

वे न फल देते हैं न छाया
एक हरे सम्मोहन से खींचते हैं
और पहुँच में आते ही
दबोच कर सारा ख़ून चूस लेते हैं

उस वक़्त बिल्कुल मनुष्यों की तरह
हो जाता है सारा जंगल
एक भी वृक्ष आगे नहीं बढ़ता।

1 month ago

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