राकेशधर द्विवेदी: हे राम तुम फिर से, इस धरा पर आओ

कविता
                
                                                             
                            हे राम तुम फिर से,
                                                                     
                            
इस धरा पर आओ।
 
नव सृजन के नवनिर्माण के,
गीत फिर से गाओ।
हे राम तुम फिर से,
इस धरा पर आओ।
 
भक्त अब फिर से डरे हैं,
संत भी सहमे खड़े हैं।
इस अंधकार और निशा से,
तुम हमें बचाओ।

हे राम तुम फिर से,
इस धरा पर आओ। आगे पढ़ें

3 months ago

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