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शैलेंद्र कपिल की 3 कविताएं 

कविता
                
                                                                                 
                            2 फरवरी, 1962 को जन्मे शैलेंद्र कपिल चंडीगढ़, हरियाणा से हैं। भारतीय रेलवे में मुख्य वाणिज्य प्रबंधक हैं लेकिन प्रवृत्ति से लेखक व कवि हैं।  प्रकाशित काव्य संग्रह - हर पत्थर हीरा है, कल नई सुबह होगी, फिर कुछ कर दिखाना होगा, हमसफर के साथ। ‘हर पत्थर हीरा है’ काव्य पुस्तक पर रेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सन् 2011 में ‘मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार’ प्राप्त । प्रस्तुत है शैलेंद्र कपिल की 3 कविताएं- 
                                                                                                



( 1 )
साँसें
जिनकी साँसें असमय
ही छीन ली है मानवद्रोही 'विषाणुओं' ने !
उनके लिए मैं रचना चाहता हूं 
एक शोक गीत
जिसमें मौन नहीं 
अपितु जीवन की साँसें हों 
स्वर्णिम स्वप्नों के 
सुंदर दृश्य और 
जीवन में वापसी के 
पुरजोर विचार हों ।

चेहरे पर मुस्कान 
और आँखों में 
उम्मीद का आकाश हो ।
मैं इस निराशा के घोर 
अंधकार में भी 
अश्रुपुरित नहीं, ‘आशापूरित’ 
एक शोक गीत रचना चाहता हूँ
असमय विदा लिए हुए लोगों 
के प्रति 
क्योंकि वे मरे नहीं,
हादसे का शिकार हुए हैं,
और हादसों के शिकार लोग
जल्द ही जीवन में वापसी करते हैं।  
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दुःख 

1 month ago

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