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त्रिलोचन की कविता- पथ पर चलते रहो निरंतर

कविता
                
                                                                                 
                            पथ पर 
                                                                                                

चलते रहो निरंतर 

सूनापन हो 
या निर्जन हो 
पथ पुकारता है 
गत-स्वप्न हो 

पथिक, 
चरण-ध्वनि से 
दो उत्तर 

पथ पर 
चलते रहो निरंतर 
1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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