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फ़िराक़ गोरखपुरी - अलहदा अंदाज़ और मिज़ाज का शायर

Firaq Gorakhpuri
                
                                                                                 
                            कम से कम मौत से ऐसी मुझे उम्मीद नहीं
                                                                                                

ज़िंदगी तू ने तो धोके पे दिया है धोका


फ़िराक़ गोरखपुरी एक ऐसे शायर थे जिन्होंने अपनी शायरी और अपने अलहदा अंदाज़ से हर उम्र के लोगों को अपना मुरीद बनाया है। उनकी शायरी और उनके अलमस्त मिज़ाज के बारे में बातचीत होना मानो कन्नौज से आए हुए, सबसे मंहगे लाखों रुपये किलो वाले किसी इत्र का भरी महफ़िल में खुल जाना है। ऐसे अंदाज़ और ऐसे मिज़ाज की ख़ुशबू से जुदा होना बेहद मुश्किल है।

ये फ़िराक़ साहब के जीवन की हक़ीक़त बयानी ही है, उनका भोगा हुआ सच है जो वे कहते हैं कि आदमी को आखिरी उम्मीद मौत से ही है, ये ज़िन्दगी तो हर तरह से फ़रेब करती है, धोका देती है, ख़्वाबों को तोड़ती है। जीवन की हक़ीक़त को लिखना इस ख़ुदरंग शायर का ख़ास अंदाज़ था जो उन्हें उर्दू शायरी की दुनिया में कई शायरों से अलग ला खड़ा करता है। आगे पढ़ें

2 years ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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