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मेरे अल्फाज़

है कसम आज से कुछ कहूंगा नहीं

Krishna Mohan

46 कविताएं

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चाहती हो जो करके दिखा दूंगा मैं,
ये न सोचो कि तुमको भुला दूंगा मैं।
जो भी वादे किए हैं न भूले हैं हम,
तेरे वादे पे खुद को लुटा दुंगा मैं।।

है मुश्किल डगर लेकिन चलते रहो,
ख़्वाब बनके ही आंखों में पलते रहो।
चलती राहों में ग़र दीप बुझने लगे,
तुम बस करना इशारा हवा दूूूंगा मैं।।

आरजू है यही माफ़ कर दो अगर,
प्रेम का मेरे इंसाफ कर दो अगर।
तेरे दामन पे ग़र आंच आई कभी,
सारे ख़त धीरे-धीरे जला दुंगा मैं।

है कसम आज से कुछ कहूंगा नहीं,
स्वार्थ के दर्द को अब सहूंगा नहीं।
तुम सलामत रहो है दुआ ये मेरी,
दिल तो पागल है इसको मना लूूूंगा मैं।।

कृष्ण मोहन उपाध्याय
मऊ, उत्तर प्रदेश।

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