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राग भी तू ,अनुराग भी तू....

                
                                                                                 
                            मेरे अंतर्मन को सीचे l
                                                                                                

ऐसा ख़्वाब और ख़याल भी तू l

मंजिल तक पहुँचाए जो l
उस पथ का हमराही भी तू ll

गंगा में बहती धारा सा l
ऐसे मन का सार भी तू ll

काँटों से लिपटे फूलों पर l
ऐसे बैठे वह भँवरा भी तू ll

पर्वत श्रृखंला सा अडिग l
ऐसा मेरे मन का विश्वास भी तू ll

चंद लम्हों में हसरत जैसा l
ऐसा एक पल का ऐतबार भी तू ll

-अपराजिता

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1 month ago

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