रिश्तों का सौदा

                
                                                             
                            महफ़िल में मेरे होने का ज़िक्र तक भी ना हुआ 
                                                                     
                            
सबकुछ खो दिया हमने मगर कुछ हासिल ना हुआ।।
जिसके लिए किया था मैंने अपने जीवन को समर्पित
उसको ही मेरे होने से अब कुछ भी फर्क ना पड़ा।।
मतलब के सारे रिश्ते है और सबके जज्बात है यहां
जबतक तलक है स्वार्थ है तब तक साथ वो खड़ा।।
तेरे जीने से या मरने से किसी को कुछ भी है ना वास्ता
रिश्ते निभाने खातिर तू भी है क्यों यहां बेकार में पड़ा।।
अच्छाई है अब सस्ती यहां और बुराई है अब महंगी
चेहरे पे दोहरेपन का लगा है अब सबको यहां मुखौटा।।

नाम - प्रिया पाण्डेय
जिला - सुलतानपुर
 
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7 months ago

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