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मेरे अल्फाज़

दिल उसके कूचें में .....

SHANKAR lal

33 कविताएं

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दिल उसके कूचें में खो गया
वो गुरूर से कुचल कर चली गई
मै चिराग था बुझा बुझा
वो चॉदनी रात सी चमक कर चती गयी

हम मिले तो ऎसे मिले
दूरियां और बढती चली गई
ना कभी वो बढ़ी ना कभी हम बढे
पहल् उनकी हमारी सिमटती चली गई

उनके पास उनके हिस्से का शबाब था
मेरे हिस्से में मेरी शराब थी
ना जाम छलक सका ना वो शबाब छलका सकी
सागर बीच में था प्यास और बढती चली गई

मैने उसको उसने मुझको भूलना चाहा मगर कोशिश कोई काययाब् ना हो सकी
खुश नशीबी का सूरज छिपता रहा हर शाम
बदननशीबी की बारात हर दिन चढती चली गई

तकदीर का मेरी और उसका
सितारा कहीं खो गया
ना वो चैन से जी सकी
ना मै चैन से मर सका
इश्क के प्यास की जिन्दगी प्यार के समुन्दर
के किनारे रेत में दम तोडती चली गई

शंकर बुलंदशहरी 8881382349 9219


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