26. जुगनू

                
                                                             
                            जुगनू!
                                                                     
                            
तू रात में हो।
रात मे ही बराबर नजर आते हो।
तुझमे कभी प्रकाश चमकता है,
कभी मिट जाता है।
वह भी बिल्कुल अल्प
थोड़ी देर तक भी नहीं टिकता है
तेरा प्रकाश।
इससे तो राह नजर नहीं आ सकती है
वहाँ के लिए
जहाँ तुझे जाना है।
स्थायी और अधिक प्रकाश तुझमें
उत्पन्न हो
इसके लिए सतत् प्रयास में रहो।
नहीं तो
रात में ही रह जाओगे
घूमते ।
 
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7 months ago

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