आंखें नहीं थीं फिर भी एक शख़्स दिलीप कुमार की यह फिल्म 36 बार देखने गया सिनेमा हाॅल  

आंखें नहीं थीं फिर भी एक शख़्स दिलीप कुमार की यह फिल्म 36 बार देखने गया सिनेमा हाॅल
                
                                                             
                            शाहजहां, अंदाज़, मुग़ल-ए-आज़म, बैजू बावरा, मदर इंडिया और गंगा जमुना जैसी फ़िल्मों में दिलकश संगीत देने वाले संगीतकार नौशाद बहुत सादा मिज़ाज इंसान थे। आम लोगों से मिलने-जुलने में भी वह कोई गुरेज़ नहीं करते थे।  एक बार उनकी एक ऐसे नाबीना शख़्स (जो देख नहीं सकते) से मुलाक़ात हुई जो फ़िल्म देखने नहीं बल्कि सुनने के लिए जाता था।
                                                                     
                            

पेंगुइन से प्रकाशित नौशाद की जीवनी ज़र्रा बना आफ़ताब में चौधरी ज़िया इमाम लिखते हैं कि नौशाद साहब की फ़िल्म 'दीदार' की नुमाइश मुंबई के मिनर्वा सिनेमा हॉल में लगी थी। एक दिन किसी काम से नौशाद साहब को वहां जाना पड़ा गया, वे सिनेमा के मैनेजर से मिले और अपने काम की बात करने के बाद जब चलने लगे तो उस समय शो चल रहा था तो मैनेजर ने उनसे कहा, "नौशाद साहब अगर वक़्त हो तो थोड़ी देर रुक जाइए मैं आपकी मुलाक़ात एक साहब से करवाना चाहता हूं।"  आगे पढ़ें

1 month ago

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