'नई कविता' में मुक्तिबोध के साथ समान रूप से आदरणीय और चर्चित कवि शमशेर बहादुर सिंह की पहचान यूं तो एक समर्थ और महत्वपूर्ण कवि की है, लेकिन उनकी लिखी ग़ज़लें, रुबाइयाँ, क़ते और अशआर भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं । 

शमशेर की शायरी का...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           धुएँ की रेल चली मंज़रों में दुख गूँजा
सफ़र की बात भी है बात छोड़ जाने की
- वक़ास अज़ीज़ 


सरमा की रात रेल का डिब्बा उदासियाँ
लम्बा सफ़र है और तिरा साथ भी नहीं
- सलीम बेताब ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           सोए तो दिल में एक जहाँ जागने लगा
जागे तो अपनी आँख में जाले थे ख़्वाब के 


जो चुप-चाप रहती थी दीवार पर
वो तस्वीर बातें बनाने लगी  ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           अदब लाख था फिर भी उन की तरफ़
नज़र मेरी अक्सर रही देखती
- अज्ञात

अब इस से पहले कि रुस्वाई अपने घर आती
तुम्हारे शहर से हम बा-अदब निकल आए
- मुईद रशीदी

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1 week ago
                                                                           उसे हम पर तो देते हैं मगर उड़ने नहीं देते
हमारी बेटी बुलबुल है मगर पिंजरे में रहती है
- रहमान मुसव्विर 


गुलों की पालकी में है बहारों की वो बेटी है
चहेती चाँद की रौशन सितारों की वो बेटी है
- रशीद हसरत...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           मैं उतर नहीं सकता दूसरे किनारे पर
दूसरा किनारा तो दूसरा किनारा है
- इसहाक़ विरदग 


हम किनारा किए किनारों से
खेला करते हैं मंजधारों से
- आमिर मौसवी ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           तुम्हें जब कभी मिलें फ़ुर्सतें मिरे दिल से बोझ उतार दो
मैं बहुत दिनों से उदास हूँ मुझे कोई शाम उधार दो 


जिन्हें मानता ही नहीं ये दिल वही लोग मेरे हैं हम-सफ़र
मुझे हर तरह से जो रास थे वही लोग मुझ से बिछड़ गए ...और पढ़ें
2 weeks ago
                                                                           सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं
ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं 


कुछ तो मिरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए आ ...और पढ़ें
2 weeks ago
                                                                           कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं
क्या सितम है कि हम लोग मर जाएँगे
- जौन एलिया ...और पढ़ें
2 weeks ago
                                                                           हम इश्क़ के मारों का इतना ही फ़साना है
रोने को नहीं कोई हँसने को ज़माना है 


तेरी बातों से आज तो वाइज़
वो जो थी ख़्वाहिश-ए-नजात गई ...और पढ़ें
2 weeks ago
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