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आशुफ़्ता चंगेज़ी की ग़ज़ल: बुरा मत मान इतना हौसला अच्छा नहीं लगता 

उर्दू अदब
                
                                                                                 
                            बुरा मत मान इतना हौसला अच्छा नहीं लगता 
                                                                                                

ये उठते बैठते ज़िक्र-ए-वफ़ा अच्छा नहीं लगता 

जहाँ ले जाना है ले जाए आ कर एक फेरे में 
कि हर दम का तक़ाज़ा-ए-हवा अच्छा नहीं लगता 

समझ में कुछ नहीं आता समुंदर जब बुलाता है 
किसी साहिल का कोई मशवरा अच्छा नहीं लगता 

जो होना है सो दोनों जानते हैं फिर शिकायत क्या 
ये बे-मसरफ़ ख़तों का सिलसिला अच्छा नहीं लगता  आगे पढ़ें

1 month ago

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