विज्ञापन

अभिषेक शुक्ला: 3 चुनिंदा ग़ज़लें

abhishek shukla selected ghazal collection
                
                                                                                 
                            अब ख़ल्क अगर ख़ुदा बनाए
                                                                                                

मिट्टी के रंग का बनाए

मुझमें भी चराग़ जल उठेंगे
तू ख़ुद को अगर हवा बनाए

तारीफ़ यही तो है हमारी
वो ज़ह्र कि जो दवा बनाए

मैं रात बना रहा हूं ख़ुद को
है कोई कि जो दिया बनाए

मुझको जो बरहना देखना हो
दुनिया मेरी क़बा बनाए

ख़ालिक है वो तो फिर कहो न 
हमको भी इक ज़रा बनाए  आगे पढ़ें

2

1 month ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X