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कैलाश मनहर: अभी तो वक़्त का काफ़ी हिसाब बाक़ी है 

उर्दू अदब
                
                                                                                 
                            अभी तो वक़्त का काफ़ी हिसाब बाक़ी है 
                                                                                                

हमें जो पढ़नी है असली किताब बाक़ी है।

इन्हें सम्भाल कर रखूँगा ग़ुम न जाएँ कहीं,
ख़राबियाँ जो अब देंगी ख़िताब बाक़ी है।

तेरा गुरूर भी तोड़ेगी आबरू मेरी,
अभी तो आख़िरी जाम-ए-शराब बाक़ी है।

अभी गिरफ़्त में है मुल्क़ तानाशाही की,
कितना जाने अभी ख़ाना ख़राब बाक़ी है। आगे पढ़ें

1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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