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अलग अंदाज़ के शायर सिराज लखनवी की ग़ज़लों से चुनिंदा शेर

अलग अंदाज़ के शायर सिराज लखनवी की ग़ज़लों से चुनिंदा शेर...
                
                                                                                 
                            सिराज की शायरी और ग़ज़लों में विषय चाहे जो हों लेकिन ताजापन बना रहता है, इससे उनके रचनात्मक अनुभव और दूरदर्शिता का पता चलता है। सिराज जीवन को अलग नजरिए से देखते हैं। आज हम पाठकों के लिए पेश कर रहे हैं सिराज लखनवी के 20 चुनिंदा शेर-
                                                                                                


मैं कब का रौ में इन अश्क़ों की अब तक बह गया होता
इन आंखों पर तरस खाकर यह किसने आस्तीं रख दी ?

आँखें खुलीं तो जाग उठीं हसरतें तमाम
उस को भी खो दिया जिसे पाया था ख़्वाब में

आग और धुआं और हवस और है इश्क़ और
हर हौसला-ए-दिल को मोहब्बत नहीं कहते

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1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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