ज़फ़र गोरखपुरी: ग़म थका-हारा मुसाफ़िर है चला जाएगा 

आज का शब्द
                
                                                             
                            दिन को भी इतना अंधेरा है मिरे कमरे में 
                                                                     
                            
साया आते हुए डरता है मिरे कमरे में 

ग़म थका-हारा मुसाफ़िर है चला जाएगा 
कुछ दिनों के लिए ठहरा है मिरे कमरे में 

सुब्ह तक देखना अफ़्साना बना डालेगा 
तुझ को इक शख़्स ने देखा है मिरे कमरे में  आगे पढ़ें

3 months ago

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