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रेनर मरिया रिल्के

विश्व काव्य

धर्मवीर भारती द्वारा अनुदित  जर्मन कवि रैनेर मरिया रिल्के की कविता- प्रेम 

अमर उजाला, काव्य डेस्क

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अनजाने परों पर आसीन
मैं
स्वप्न के अंतिम सिरे पर

वहाँ मेरी खिड़की है
रात्रि की शुरूआत जहाँ से होती है

और 
वहाँ दूर तक मेरा जीवन फैला हुआ है आगे पढ़ें

वे सभी तथ्य मुझे घेरे हुए हैं

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