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UP : सपा ने की रामपुर में दोबारा मतदान कराने की मांग, धांधली का आरोप लगाते हुए चुनाव आयुक्त को लिखा पत्र

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 08 Dec 2022 12:15 AM IST
सार

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ईवीएम को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि जर्मनी ने 2009 में ही ईवीएम को नकार दिया था। इसके बाद भी भारत के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ईवीएम की कौन सी बारीकी सिखाई जा रही है।

अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव
अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

समाजवादी पार्टी ने रामपुर उपचुनाव में धांधली का आरोप लगाया है। यहां दोबारा उपचुनाव कराने की मांग की है। इस संबंध में पार्र्टी के प्रमुख महासचिव प्रो रामगोपाल यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को पत्र लिखा है। आयुक्त को भेजे गए पत्र में सपा ने आरोप लगाया है कि रामपुर में चुनाव की निष्पक्षता तार-तार हुई है। यहां उपचुनाव में शासन द्वारा बड़े पैमाने पर धांधली कराई गई है। वोटरों को मतदान से रोका गया। पुलिस की बर्बरता से कई लोग घायल हुए। आयोग को भेजे गए पत्र में पुलिस बर्बरता से जुड़े फोटो भी भेजे गए हैं। लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था की याद दिलाते हुए दोबारा चुनाव कराने की मांग की गई है।



भाजपा नेता पर पिटाई का आरोप
समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि उपचुनाव के दौरान भाजपा नेताओं के इशारे पर तमाम कार्यकर्ताओं की पिटाई की गई है। देवामई बूथ पर वोट डालने जा रहे राकेश शाक्य की पत्नी ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता की गाड़ी से उसे तीन बार टक्कर मारी गई। गंभीरावस्था में राकेश को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी तरह अन्य इलाके में भी कई सपा समर्थकों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।



 


अखिलेश ने ईवीएम पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ईवीएम को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि जर्मनी ने 2009 में ही ईवीएम को नकार दिया था। इसके बाद भी भारत के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ईवीएम की कौन सी बारीकी सिखाई जा रही है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी और जर्मनी के विदेश मंत्री की ईवीएम के साथ फोटो भी शेयर की है। उन्होंने लिखा कि जो देश खुद ईवीएम पर भरोसा नहीं करता वह दूसरे को ईवीएम की बारीकी सिखा रहा है यह हास्यास्पद है।

उपचुनाव में हुई लोकतंत्र की हत्या : पांडेय
सपा के मुख्य सचेतक डॉ मनोज कुमार पांडेय ने आरोप लगाया कि मैनपुरी लोकसभा और रामपुर व खतौली विधानसभा उपचुनाव में लोकतंत्र की हत्या हुई है। भाजपा के इशारे पर शासन- प्रशासन ने मतदाताओँ का उत्पीड़न किया। उन्हें मताधिकारी से रोका। रामपुर में तो पुलिस ने जाति-धर्म देखकर मतदाताओं से मारपीट की, जिसमें बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। वह बुधवार को पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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मुख्य सचेतक डा. पांडेय ने कहा कि रामपुर मतदाताओँ पर अन्याय की पराकाष्ठा हुई है, जिसका नतीजा है कि उपचुनाव में मतदान का प्रतिशत बहुमत कम रहा। उन्होंने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग करते हुए लोकतंत्र बचाने की अपील की। मुख्य सचेतक ने कहा कि प्रदेश में किसानों को उनकी उपज की खरीद नहीं हो रही है। किसान डीएपी और यूरिया के लिए परेशआन है। नहरों में पानी नहीं है और बिजली की स्थिति निरंतर गंभीर होती जा रही है। इसके बाद भी सरकार सब चंगा होने का दावा कर रही है। अस्पतालों में दवाएं गायह हैं। डेंगू के इलाज में लोगों के जेवर तक बेचने पड़ रहे हैं। मौके पर सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, इंद्रजीत सरोज, लालजी वर्मा आदि भी मौजूद रहे।

सरकार नहीं चाहती की सदन चले
कैबिनेट सत्र की चर्चा क रते हुए मुख्य सचेतक ने कहा कि  सरकार ने कैबिनेट के फैसले से तीन दिन के लिए विधानसभा का सत्र बुलाया था। विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में भी 5, 6 व 7 दिसंबर को सत्र चलने की स्वीकृति हुई थी। लेकिन सरकार ने दूसरे दिन ही अचानक सदन स्थगित कर दिया। सदन में जनसमस्याओं और जनता के मुद्दों पर चर्चा होनी थी। सदस्यों के द्वारा तमाम प्रश्न लाए गए थे। यह सरकार हर विषय पर लोकतंत्र की हत्या कर रही है। संविधान नहीं मान रही है। सरकार चाहती है कि सदन न चलाना पड़े। इस विधानसभा के गठन के नौ माह हो गए। इसके बाद भी अभी तक विधानसभा की समितियों का गठन नहीं हुआ है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण लोक लेखा समिति होती है, जिसका कार्य सरकारी महकमों के खर्चों का लेखा जोखा जांचना होता है।

फर्जी तरीके से फंसाने की साजिश
मुख्य सचेतक ने आरोप लगाया कि कानपुर के विधायक इरफ़ान सोलंकी को फर्जी तरीकेसे फंसाया जा रहा है। मामले में एक महिला और कानपुर विकास प्राधिकरण का विवाद चल रहा था। सीसीटीवी में भी देखा गया कि घटना के समय इरफान सोलंकी या उनके परिवार का कोई भी सदस्य घटनास्थल पर मौजूद नही था। दबिश के नाम पर इरपान की पत्नी और उनके बच्चों को परेशान किया गया। उन लोगों को अपमानित किया गया।

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