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Kisan Mahapanchayat : भाकियू फिर से बड़ी ताकत बनने की तैयारी में, तेवरों में दिखी सत्ता परिवर्तन की ललक

अमित मुद्गल, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 27 Nov 2022 06:00 AM IST
सार

Mahapanchayat  : भाकियू फिर से बड़ी शक्ति बनने की तैयारी में जुट गई है। लखनऊ में हुई महापंचायत में किसानों ने जिस तरह के तेवर दिखाए, उससे यह साफ हो गया कि 2024 में सत्ता परिवर्तन करने के लिए उसने अभी से ताल ठोक दी है।

महापंचायत में मौजूद राकेश टिकैत।
महापंचायत में मौजूद राकेश टिकैत। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

विधानसभा चुनाव 2022 में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने प्रत्यक्ष तौर पर न सही पर सत्ता परिवर्तन के लिए पूरी जोर आजमाइश की। बावजूद इसके सभी दाव फेल साबित हुए। इस टीस को दूर करने के लिए भाकियू फिर से बड़ी शक्ति बनने की तैयारी में जुट गई है। लखनऊ में हुई महापंचायत में किसानों ने जिस तरह के तेवर दिखाए, उससे यह साफ हो गया कि 2024 में सत्ता परिवर्तन करने के लिए उसने अभी से ताल ठोक दी है।



लखनऊ में हुई महापंचायत में जहां पश्चिमी उप्र के बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गौतमबुद्घनगर, शामली, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली आदि के किसान आए थे तो वहीं मध्य एवं पूर्वी उप्र के जिलों के किसानों ने भी बड़ी संख्या में शिरकत की।


खास तौर पर पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बांदा, बदायूं, आगरा, सीतापुर, फर्रुखाबाद आदि के किसान पूरे लाव लश्कर के साथ महापंचायत में पहुंचे थे। सभी के पास अपने-अपने क्षेत्रीय मुद्दे थे। लेकिन, बिजली, और गन्ना बकाया भुगतान जैसे मुद्दे सभी संयुक्त रूप से लेकर आए थे। अहम बात यह रही कि मंच पर बैठे किसान नेताओं के भाषणों में भाजपा की प्रदेश में पुन: ताजपोशी होने की टीस साफ दिखी।

राकेश टिकैत के भाषण में भी यह दर्द छलका। उन्होंने विपक्ष को भी घेरा और कहा कि सारा ठेका हमने ही लिया है क्या। विपक्ष तो सदन में आवाज तक नहीं उठाता। यानी मंतव्य साफ था कि विपक्ष यह न समझे कि किसान इसी तरह से उनके साथ रहेंगे। रास्ते और भी हैं। इरादा सत्ता परिवर्तन करने का है। उसके लिए खुद की ताकत को बढ़ाना होगा। टिकैत ने कहा कि महिला संगठन को मजबूत करो। आंदोलन में इसकी जरूरत होगी।

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा कि यह अमर बेल है। जिस पेड़ के सहारेे बढ़ती है उसी को अपनी खुराक बनाती है। टिकैत ने अपने भाषण में अन्य पार्टियों और परिवारों पर फोकस किया। कहा कि भाजपा ने कितने परिवार तोड़े। चाहे लालू हों, पासवान हों, चंद्रशेखर हों या चौटाला हो सभी इसके उदाहरण हैं। साथ ही यह भी कहा कि केवल किसान से नहीं, बल्कि मजदूर को साथ लेने से ही काम चलेगा।
गांव गांव जाना ही होगा

मंच से आह्वान किया कि किसानों के मुद्दों को निपटाने एवं परिवर्तन के लिए गांव-गांव जाना ही होगा। सभी को बताना होगा कि उनका कितना नुकसान हो रहा है। यदि आप डर गए तो सरकार आपको घरों में ही कैद कर देगी। आपको बाहर आना है। जिस तरह से प्रशासन के विरोध में गांव-गांव अभियान चलाने की बात कही, उससे साफ जाहिर हुआ कि भाकियू फिर से अपना पुराना दौर दोहराने की कोशिश में है।

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