खंडवा उपचुनाव: 41 साल बाद इस सीट पर उपचुनाव, भाजपा-कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर, गांव-गांव घूमकर इंदिरा गांधी ने मांगा था समर्थन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: प्रशांत कुमार झा Updated Tue, 19 Oct 2021 02:09 PM IST

सार

30 अक्तूबर को खंडवा लोकसभा सीट पर होने वाली वोटिंग को लेकर कांग्रेस और भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर है। कांग्रेस ने राजनारायण सिंह पुरनी पर भरोसा जताया है, तो भाजपा ने ज्ञानेश्वर पाटिल को उम्मीदवार बना कर ओबीसी कार्ड खेला है। 41 साल पहले हुए उपचुनाव में इंदिरा गांधी गांव-गांव पैदल घूमकर कांग्रेस के लिए वोट मांगा था, लेकिन उस समय कांग्रेस उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा था। 
 
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विस्तार

खंडवा लोकसभा सीट पर छह बार से सांसद रहे भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह के निधन के बाद उपचुनाव हो रहा है। इस सीट पर 41 साल बाद हो रहे उपचुनाव के लिए 30 अक्तूबर को वोट डाले जाएंगे। कांग्रेस ने पूर्व विधायक राजनारायण सिंह पुरनी को मैदान में उतारा है, वहीं, भाजपा ने ज्ञानेश्वर पाटिल को उम्मीदवार बनाकर ओबीसी कार्ड खेला है।   इस चुनाव में दोनों ही दलों के राष्ट्रीय नेता चुनाव प्रचार में शामिल नहीं हो रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ इस सीट पर प्रदेश के सबसे बड़े स्टार प्रचारक हैं।
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इससे पहले इस सीट पर 1979 में तत्कालीन सांसद परमानंद गोविंदवाला के निधन के बाद उपचुनाव हुए थे। तब जनता पार्टी के कुशाभाऊ ठाकरे ने कांग्रेस के ठाकुर शिवकुमार सिंह को हराया था। उस उपचुनाव में इंदिरा गांधी गांव-गांव घूमी थीं, लेकिन वे शिवकुमार को नहीं जितवा सकीं, लेकिन ठीक एक साल बाद 1980 में हुए आम चुनाव में ठाकरे को हार का सामना करना पड़ा था।


नंदकुमार सिंह ने बनाया ज्यादा अंतरों से चुनाव जीतने का रिकॉर्ड
खंडवा लोकसभा सीट से सबसे ज्यादा चुनाव जीतने का रिकॉर्ड नंदकुमार सिंह के नाम पर है। 2019 में इस लोकसभा सीट पर 79 फीसदी वोटिंग हुई थी। नंदकुमार चौहान ने कांग्रेस उम्मीदवार अरुण यादव को तीन लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हराकर चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया था। भाजपा अब इस सीट को अपने हाथ से फिसलने नहीं देना चाहती है। भाजपा ने संसदीय क्षेत्र में जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए करीब ढाई दशक बाद ओबीसी चेहरा पर भरोसा जताया है। भाजपा-कांग्रेस के लिए यह उपचुनाव नाक की लड़ाई बन गई है। खंडवा लोकसभा क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें खंडवा, बुरहानपुर, नेपानगर, पंधाना, मांधाता, बड़वाह, भीकनगांव और बागली शामिल हैं।

भाजपा ने  25 साल बाद ओबीसी पर लगाया दांव
मध्यप्रदेश भाजपा ने खंडवा लोकसभा सीट पर 25 साल बाद ओबीसी चेहरा को मैदान में उतारा है। इस संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 19.68 लाख है। इसमें से पिछड़ा वर्ग 5 लाख 16 हजार हैं, जबकि समान्य वर्ग के मतदाता 4 लाख से कम हैं। जातीय समीकरण के गणित पर गैर करे तो एससी-एसटी वर्ग के वोटर सबसे ज्यादा 7 लाख 68 हजार हैं। इस क्षेत्र में आठ में से सिर्फ 3 विधानसभा क्षेत्रों में आदिवासी वोटर निर्णायक भूमिका में हैं।

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