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पुरस्कार लौटाने पर संस्कृति मंत्री का बेतुका बयान

Updated Sat, 17 Oct 2015 12:05 AM IST
let writers stop writing, then we will see says culture minister mahesh sharma
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मुल्क में बढ़ रहे सांप्रदायिक तनाव और असहिष्णुता के विरोध में साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने के मुद्दे पर संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने कहा है कि साहित्यकार पहले लिखना बंद कर दें, उसके बाद विचार किया जाएगा।



उल्लेखनीय है कि बीते दिनों में दादरी में गोमांस खाने के शक में हुई अखलाक की हत्या, कर्नाटक में तर्कवादी एमएम कलबुर्गी की हत्या और मुंबई में शिवसेना के दबाव में जानेमाने गजल गायक गुलाम अली का कार्यक्रम रद्द हो जाने समेत कई ऐसे वाकये हुए हैं, जिन्हें लेकर साहित्यकारों रोष है।


उनका कहना है कि मुल्क में सांप्रदायिकता और असहिष्णुता बढ़ रही है और इससे अल्पसंख्यक भयभीत है। सरकार के रवैये के विरोध में अब तक 13 साहित्यकार साहित्य अकेडमी पुरस्कार लौटाने की घोषणा कर चुके हैं। हालांकि संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने साहित्यकारों के रोष को तवज्जो देने के बजाय कहा है कि पहले लेखक लिखना बंद कर दें, उसके बाद विचार किया जाएगा।

लेखकों की मंशा पर उठाया सवाल

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इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में महेश शर्मा ने कहा, 'ये वे (लेखक) कह रहे हैं कि वे लिखने में सक्षम नहीं है, तो पहले उन्हें लिखना बंद करने दीजिए। उसके बाद हम देखेंगे।'

साहित्य अकेडमी लौटाने के मसले पर शर्मा ने कहा कि ये पुरस्कार लेखकों का है और लेखक ही इसे देते हैं। सरकार का इससे कुछ लेनादेना नहीं है। पु‌रस्कार लौटाना उनकी निजी पसंद का मामला है।

पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों की मंशा पर सवाल उठाते हुए शर्मा ने कहा कि यदि आप पुरस्कार वापस करने वालों की मंशा तथा पृष्ठभूमि जांचेंगे तो मुझे विश्वास है कि कुछ खुलासा होगा। यदि कानून-व्यवस्था को लेकर कोई शिकायत है तो उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री, देश के गृह मंत्री या प्रधानमंत्री को बताना चाहिए था।

शर्मा ने कहा कि एक मंत्री होने के नाते वे मुझे भी लिख सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। यह सही तरीका नहीं है। मैं चाहता हूं कि वह अपनी आवाज उठाते और हम उसमें शामिल होते। हम इस उद्देश्य में उनके साथ हैं कि देश में किसी की भी हत्या नहीं होनी चाहिए।
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