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साहित्य सम्मान लौटाने वालों पर संघ का हमला

Updated Sat, 31 Oct 2015 04:50 AM IST
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साहित्यकारों और लेखकों के साथ सम्मान लौटाने की मुहिम में वैज्ञानिकों का जुड़ना संघ को नागवार गुजरा है। संघ सम्मान लौटाने की मुहिम पर तीखा हमला बोलने के साथ अब पलटवार की तैयारी में जुट गया है। सम्मान लौटा रहे साहित्यकारों के खिलाफ अब भगवा परिवार अपने समर्थक चेहरों को भी मैदान में उतारेगा। परदे के पीछे इसकी रणनीति जोरों पर है।

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साहित्य और कला के क्षेत्र में कार्य कर रही संघ की संस्कार भारती ने इस बाबत अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। आगामी शनिवार यानी 7 नवंबर को भगवा परिवार की समर्थक हस्तियां सम्मान लौटा रहे साहित्यकारों के खिलाफ सड़क पर उतरेंगी।


यह आयोजन राष्ट्रीय महत्व से जुडे़ नेशनल म्यूजियम के बाहर किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस आयोजन में मशहूर अभिनेता अनुपम खेर, फिल्म जगत से जुडे़ मधुर भंडारकर, अशोक पंडित, साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी नरेंद्र कोहली और डीपी सिन्हा सरीखे चेहरे इस अभियान में सड़क पर उतरेंगे।

साहित्यकारों के सम्मान वापसी को साजिश करार दे रहे संघ परिवार की मंशा इस कदम पर आरपार करने की है। देश के नामीगिरामी चेहरों को विरोध अभियान में शामिल करने की मुहिम में संस्कार भारती ने कमर कस तैयारी की है।

सम्मान लौटाना राजनीति से प्रेरित : होसबोले

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रांची में चल रही संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में साहित्यकारों के सम्मान लौटाने की मुहिम के खिलाफ करारा हमला बोलकर संघ नेतृत्व ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। संघ सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि सहिष्णुता-असहिष्णुता की बहस इन्होंने जानबूझकर शुरू की है। देश में ऐसी स्थिति नही है। ये नंगा नाच कर रहे हैं।

होसबोले ने सम्मान वापसी कर रहे लोगों की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि कश्मीर में जब हिंदुओं का कत्ल हुआ, गोधरा में जब कारसेवकों को जलाया गया तब सहिष्णुता कहां गई थी।

सम्मान लौटाने के कदम को राजनीति से प्रेरित करार देते हुए होसेबोले ने कहा है कि पुरस्कार लौटाने वालों का ये गैंग अपने लिए सहिष्णुता का ठेका नहीं ले सकता। कहीं कुछ गलत होता है तो हम उसकी निंदा करते ही हैं। कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों की दुकानदारी बंद हो गई है, इसलिए ये मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। इनकी कवायद वजूद बचाने के लिए है।

केंद्र सरकार के तर्कों को आगे बढ़ाते हुए संघ ने कहा कि दादरी की घटना वाले उत्तर प्रदेश में किसकी सरकार है। कलबुर्गी की हत्या वाले कर्नाटक में किसकी सरकार है? संघ की सरकार तो कहीं नही हैं, न ही हमारे विचार के समर्थन वाली सरकार है।

गुजरात में जब हुआ था तो मोदी सरकार बोलते थे। तब तो किसी ने केंद्र सरकार पर आरोप नहीं मढ़ा। अब मुलायम सिंह सरकार क्यों नही बोलते।

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