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हौसले को सलाम: मुश्किलों ने डराया लेकिन डटी रहीं राखी, बनीं मिसाल, 25 बीघा भूमि पर अकेले दम पर कर रहीं खेती

मदन बालियान, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 04 Nov 2022 02:21 PM IST
किसान राखी
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मुजफ्फरनगर तितावी गांव की बेटी राखी लाटियान ने मुश्किल वक्त में हौसले से कामयाबी की नई इबारत लिख दी है। परिवार में भाई नहीं और सिर से पिता का साया भी उठ गया। ऐसे में पढ़ाई के साथ 25 बीघा जमीन पर खुद खेती कर बेटी मिसाल बन गई। घर में अकेली मां के लिए वह बेटे से बढ़कर है।



पानीपत-खटीमा हाईवे पर बसे तितावी गांव के खेतों में पुरुषों के साथ महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर खेती करती हैं। मगर, एक बेटी ऐसी भी है, जो अकेले दम पर अपने परिवार की देखभाल कर रही है और साथ में खेती भी कर रही है। एमए एजुकेशन और कंप्यूटर की पढ़ाई कर चुकी राखी लाटियान इन दिनों खेतों में ट्रैक्टर चलाते हुए नजर आती हैं। वह बाइक दौड़ाती हैं और खेतों की सिंचाई करती है। चीनी मिल पर ट्रैक्टर से गन्ना तौलने के लिए जाती है। बुग्गी खुद भरती है। फावड़ा भी चलाती है। 
किसान राखी
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राखी बताती है कि परिवार में हम सिर्फ तीन बहने हैं। बड़ी बहन नमिता और मीनू की शादी हो चुकी है। कई साल पहले बीमारी के चलते पिता ध्यान सिंह का निधन हो गया था। ऐसे में मां बोहती देवी (75) बेहद परेशान हुई। राखी ने हौसला दिखाते हुए पढ़ाई के साथ खेती में मां का सहयोग शुरू किया। धीरे-धीरे वह खेती करना सीख गई। अब वह अकेले दम पर अपनी खेती कर रही है।
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पहाड़ सी चुनौती है नौ जगह जमीन
तितावी की बेटी की सबसे बड़ी मुश्किल है, उसकी जमीन नौ जगह है। एक ही गांव में दूर-दूर जमीन होने के कारण कठिनाई का सामना करना पड़ता है। खेती में खर्च भी अधिक आता है।
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दुनियाभर में लोगों ने राखी को सराहा
पहले शिक्षा और अब खेती में तितावी का नाम रोशन कर रही राखी लाटियान ने अपने नाम से यू-ट्यूब चैनल भी बनाया। चार महीने में ही उससे काफी संख्या में लोग जुड़ गए। उसके कार्य और हौसले की खूब सराहना की। आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। राखी कहती है कि अपने चैनल के माध्यम से वह लोगों से जुड़ती है। दूर-दूराज से लोग मिलने के लिए आते हैं और कॉल कर भी उसका हौसला बढ़ाते हैं।
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मेरे गांव ने मुझे हिम्मत दी : राखी
अविवाहित राखी लाटियान कहती है कि गांव और समाज हमारी ताकत है। मेरे गांव के हर व्यक्ति ने हिम्मत दी। जरूरत पड़ने पर साथ दिया। हर तरह के लोग होते हैं। मेरे गांव की तरह अन्य गांव के लोगों को भी अपनी बेटियों का सहयोग करना चाहिए। बदलते दौर में बेटियां किसी से कम नहीं है।
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