करनाल में महापड़ाव: प्रशासन के अड़ियल रवैये के कारण बिगड़ी बात, दिल्ली की तर्ज पर डट गए किसान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 08 Sep 2021 09:47 PM IST
करनाल में किसानों का प्रदर्शन।
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28 अगस्त को करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज और एसडीएम के सिर फोड़ने की वीडियो वायरल होने के बाद भड़के किसानों ने मंगलवार को करनाल में डेरा जमाया था। पहले महापंचायत और फिर प्रशासन से वार्ता विफल होने के बाद किसान सचिवालय रोड पर धरना देकर बैठे हुए हैं। बुधवार को पूरे देश की नजरें करनाल पर लगी थीं। किसानों और प्रशासन की बातचीत विफल होने के बाद तय हो गया कि धरना जारी रहेगा। वहीं किसानों के महापड़ाव से जिले की सबसे महत्वपूर्ण जगह जाम है। सचिवालय के अंदर 40 विभागों के कार्यालयों के अलावा सेक्टर-12 के 20 से ज्यादा बैंक, 15 से ज्यादा बीमा कंपनियों और 30 से ज्यादा अन्य निजी कार्यालय, इसी रोड पर स्थित हैं। यहां हजारों लोग कामकाज के लिए आते हैं। ऐसे में लोगों को डर है कि अगर किसानों ने सेक्टर-12 रोड को लंबे समय तक के लिए बंद रखा तो इससे लोगों का न केवल सरकारी बल्कि गैर सरकारी काम काज भी प्रभावित होगा। वहीं एसडीएम पर कार्रवाई की मांग कर रहे किसान मांगें न पूरी होने पर पक्के मोर्चे की तैयारी में हैं। सोमवार रात सड़क पर दरी बिछा कर सोए किसानों ने मंगलवार सुबह सचिवालय रोड पर टेंट लगाने शुरू कर दिए।   
धरने पर बैठीं महिलाएं।
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महिलाएं भी पीछे नहीं 
करनाल महापंचायत में हरियाणा के साथ ही पंजाब और यूपी की भी महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। हरियाणा के कैथल जिले के गुहला-चीका से करनाल महापंचायत में पहुंची भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां की उप प्रधान चरणजीत कौर ने कहा कि नौ माह से वह अन्य महिलाओं के साथ तीन कृषि कानून के खिलाफ आवाज उठा रहीं हैं।  
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धरने पर बैठे योगेंद्र यादव।
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सुशील काजल के लिए मांगा इंसाफ
किसानों ने एक सुर में लाठीचार्ज में जान गंवाने वाले किसान सुशील काजल को न्याय दिलाने की मांग उठाई। मंच से किसानों ने मृतक सुशील को न सिर्फ शहीद का दर्जा दिया, बल्कि उसकी तस्वीर मंच पर रखकर श्रद्धा सुमन भी अर्पित किए। इस दौरान सुशील की पत्नी और बेटे ने भी किसान आंदोलन और न्याय के लिए लड़ते रहने का संकल्प लिया। करनाल में 28 अगस्त को भाजपा के कार्यक्रम का विरोध करने पहुंचे किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया गया था। इस दौरान घरौंडा क्षेत्र के रायपुर जटान गांव निवासी सुशील काजल को भी चोट आई थी। घर पहुंचने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार सुशील काजल आरंभ से ही किसान आंदोलन से जुड़े हुए थे और लाठीचार्ज की घटना से काफी आहत थे।
धरने पर बैठे किसान।
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ये हैं किसानों की मांगें
किसान में लाठीचार्ज के बाद जान गंवाने वाले किसान सुशील काजल को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। सुशील की मौत के बाद अब किसान संगठन उन्हें शहीद का दर्जा दे रहे हैं और उनके परिजनों के लिए 25 लाख की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं। किसान संगठनों की ओर से लाठीचार्ज के दोषी अफसरों के खिलाफ केस दर्ज करने और घायल किसानों को दो-दो लाख रुपये मुआवजे देने की मांग की गई है।
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धरने पर बैठे किसान नेता।
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आंदोलन से लिखा जाएगा नया अध्याय : राजेवाल
बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि पूरी दुनिया में कभी ऐसा आंदोलन नहीं हुआ। इस आंदोलन ने दुनिया का ध्यान खींचा है। किसान कसम खाए कि जोश में कोई गलत काम न करे जिसकी सजा सबसे बड़े आंदोलन को मिले। हरियाणा राज्य का इस आंदोलन में अहम स्थान है। आज हरियाणा नया अध्याय लिख रहा है। शांतिमय रहोगे तो जीत होगी यदि जोश में होश खोकर हिंसक हो गए तो हार जाओगे। सत्याग्रही को शारीरिक कष्ट सहना पड़ता है। जोश व होश के सामंजस्य के साथ आगे बढ़ें तो कोई ताकत हरा नहीं सकती।
 
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