नरेंद्र गिरि: सबको भगवन कहकर करते थे संबोधित, किसी से भी मिलने के लिए नहीं मानते थे कोई प्रोटोकॉल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 21 Sep 2021 02:14 PM IST
महंत नरेंद्र गिरि
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अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत जितने बड़े संत थे उतने ही उदार और सौम्य भी। विवादों से भले उनका नाता जुड़ा रहा, लेकिन नरेंद्र गिरि सबके लिए समान व्यवहार रखते थे। अधिकतर समय प्रयागराज में रहते थे, लेकिन हरिद्वार आने पर सभी संतों से चर्चा करते थे।

स्वयं श्री निरंजनी अखाड़े से जुड़े थे, लेकिन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के नाते सभी अखाड़ों और संप्रदाय के संतों से उनकी बेहद नजदीकियां रही। केंद्र से प्रदेश की सत्ता में कोई भी पार्टी रहे, उनका आशीर्वाद लेने सभी नेता आते थे।

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भक्तों से मुलाकात करने के लिए किसी तरह का प्रोटोकॉल फॉलो नहीं करते थे। हर किसी को भगवन से संबोधन करते थे। उनका सौम्य स्वभाव ही था कि उनके शिष्य आनंद गिरि पर को उन्होंने विवाद के बाद भी माफ कर दिया था। 

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संत आनंद गिरि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ब्रह्मलीन श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के सबसे प्रिय शिष्य रहे। मई 2021 में गुरु-शिष्य के बीच तल्खियां बढ़ीं। इसकी वजह शिष्य पर संत परंपरा का उल्लंघन कर परिवार से मिलने और गद्दी का चढ़ावा निजी हितों पर लगाने का आरोप था। कई दिनों तक गुरु-शिष्य के विवाद एवं आरोप प्रत्यारोपों के बीच गुरु पूर्णिमा पर नरेंद्र गिरि ने संत आनंद गिरि को माफ करते हुए आशीर्वाद दिया।
महंत आनंद गिरि और योग गुरु आनंद गिरि
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श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने शिष्य आनंद गिरि को संन्यास परंपरा के उल्लंघन के आरोप में प्रयागराज स्थित बाघंबरी पीठ लेटे हनुमान मंदिर की गद्दी से हटा दिया था। इतना ही नहीं, श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के पत्र जारी करने के बाद संत आनंद गिरि को श्री निरंजनी अखाड़ा से भी 14 मई को बाहर कर दिया था।
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आनंद गिरि
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अखाड़े से बाहर करने से पहले बकायदा श्री निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वरों ने संत आनंद गिरि पर लगे संत परंपरा के उल्लंघन के आरोपों की जांच की थी। पंच परमेश्वरों ने संत आनंद गिरि के परिवार के साथ संबंध होने की पुष्टि की थी। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने शिष्य आनंद गिरि पर गद्दी के चढ़ावे से अपने निजी हित साधने के आरोप लगाए थे।
महंत नरेंद्र गिरि
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इस विवाद में संतों की मध्यस्थता के बीच संत आनंद गिरि ने गुरु नरेंद्र गिरि के पैर पकड़े। प्रयागराज में नरेंद्र गिरि ने गुरु पूर्णिमा के दिन शिष्य आनंद गिरि को माफ करते हुए वीडियो जारी किया। आनंद गिरि ने गुरु और निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वर से भी माफी मांगी। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने आनंद गिरि को माफ करते हुए आशीर्वाद दिया था। उन्होंने कहा कि वह उनके शिष्य बने रहेंगे और श्री मठ बाघंबरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर में आकर पूजा कर सकते हैं। 
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आनंद गिरि
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प्रयागराज की गद्दी से हटाने और अखाड़े से निकाले जाने के बाद संत आनंद गिरि ने अपने गुरु श्रीमहंत नरेंद्र गिरि और अखाड़े के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने कई गंभीर आरोप भी लगाए थे। नरेंद्र गिरि का अपने शिष्य के सिर से हाथ उठने के बाद प्रशासन की ओर से भी आनंद गिरि पर शिकंजा कसा गया। संत आनंद गिरि का श्यामपुर कांगड़ी में आश्रम बन रहा था। प्राधिकरण ने आश्रम को अवैध निर्माण बताते हुए सील कर दिया था। 
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