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Azam Khan: मेरी बर्बादी में अपनों का बड़ा हाथ, फिर भी सभी का शुक्रिया, पढ़ें- आजम के अखिलेश पर बेनाम तंज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 20 May 2022 05:19 PM IST
जेल से रिहा होने के बाद आजम खां की पहली तस्वीर
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कभी यूपी की सत्ता में हनक रखने वाले आजम खां आज जब रामपुर पहुंचे तो उनका दर्द छलक पड़ा। अपने शहर और लोगों को देखकर आजम के चेहरे पर दर्द साफ दिख रहा था। कार से ही लोगों को संबोधित करते हुए आजम खां ने जेल में बिताए गए दो साल दो माह 24 दिनों के बारे में बात की। इस दौरान उन्होंने परिवार और शहर के लोगों का जिक्र भी किया। 

जेल से रिहा हुए सपा के कद्दावर नेता एवं विधायक आजम खां ने शुक्रवार दोपहर करीब पौने दो बजे रामपुर की सीमा में प्रवेश किया। मिलक पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। जहां आजम खां ने लोगों को संबोधित किया। आजम ने अपने सियासी सफर का भी जिक्र किया। बात जुल्मों की आई तो उन्होंने सधी जुबान में अपनों पर वार किया।
आजम खान रामपुर की सीमा में पहुंचे
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कार्यकर्ताओं और समर्थकों से घिरे आजम खां ने अपने दिल की बात लोगों से कही। भारी मन से उन्होंने कहा कि हमारे, हमारे परिवार के साथ जो हुआ उसे भूल नहीं सकते। हमारे शहर को उजाड़ दिया गया। जेल में किस तरह उन्होंने समय बिताया इस बारे में भी लोगों को बताया।
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आजम खां जेल से बाहर आते हुए
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आजम ने कहा कि रात होती थी तो सुबह और सुबह होती थी तो रात का इंतजार करते थे। मुझे सजायाफ्ता कैदी की तरह जेल में रखा गया। इस दौरान उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया पर कहा कि सबसे ज्यादा जुल्म तो मेरे अपनों ने किए हैं। आजम का ये बयान सीधे तौर पर सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है। 
आजम खां जेल से हुए रिहा, बेटे अदीब और शिवपाल यादव भी मौजूद
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संबोधन के दौरान आजम अपने सियासी भविष्य पर भी बोले। उन्होंने कहा कि मेरा 40 साल का सफर बेकार नहीं जाएगा। मेरा वक्त फिर लौटकर आएगा। आजम लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान लोगों ने उनके समर्थन में नारेबाजी की।
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azam khan
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कहा कि इस दरख्त की जड़ में जहर डालने वाले लोग अपने हैं। हम आपके सामने जिंदा खड़े हैं ये किसी आश्चर्य से कम नहीं है। हमें जहां रखा गया था उस कोठरी में अंग्रेजों के जमाने में उन लोगों को रखा जाता था जिन्हें दो-तीन दिन बाद फांसी होनी होती थी। हमारी कोठरी के पास ही फांसीघर था। हमारे बच्चे और पत्नी के आ जाने के बाद हम अकेले रह गए थे, बस दीवार और छत थी। रात होती थी तो सुबह का तसव्वुर रहता था और सुबह को शाम का तसव्वुर होता था। 
 
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