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भारत से रवाना हुई कोविशील्ड वैक्सीन, बांग्लादेश को 20 लाख तो नेपाल को 10 लाख खुराक की सप्लाई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Thu, 21 Jan 2021 01:27 PM IST
वैक्सीन की एक खेप नेपाल के लिए रवाना
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भारत ने सहायता अनुदान एवं पड़ोस प्रथम नीति के तहत गुरुवार को कोविड-19 के टीके की खेप बांग्लादेश और नेपाल भेजी। इससे एक दिन पहले भूटान और मालदीव को कोविड-19 टीके की खेप भेजी गई थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने टीके की खेप पहुंचने की तस्वीर को ट्विटर पर साझा किया था।
नेपाल और बांग्लादेश को भेजी गई वैक्सीन की पहली खेप
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जयशंकर ने ट्वीट किया कि टीका मैत्री बांग्लादेश के साथ भारत के संबंधों की उच्च प्राथमिकता की पुष्टि करते हैं। कोविशिल्ड टीके की 20 लाख खुराक बांग्लादेश और 10 लाख खुराक नेपाल को भेजी जा रही हैं। इससे पहले बुधवार को भारत ने सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया द्वारा उत्पादित कोविशील्ड टीके की 1,50,000 खुराक भूटान को जबकि एक लाख खुराक मालदीव को भेजी थी।

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जयशंकर ने ट्वीट कर कहा था कि टीका मैत्री प्रारंभ। भूटान पहुंची इसकी खेप। पड़ोस प्रथम नीति का एक और उदाहरण। भूटान के विदेश मंत्री तांडी दोरजी ने इस उदार तोहफे के लिए भारत के प्रति आभार जताया था। गौरतलब है कि भारतीय वायु सेना के एएन32 विमान से भूटान को टीके की खेप भेजी गई। एक ट्वीट में मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने टीके के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया था।

नेपाल और बांग्लादेश को भेजी गई वैक्सीन की पहली खेप
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इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने ट्वीट किया कि अगला गंतव्य बांग्लादेश। भारत निर्मित कोविड टीका बांग्लादेश के लिए रवाना। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि मेड इन इंडिया कोविड टीके की खेप नेपाल के लिए रवाना। गौरतलब है कि मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत सहायता अनुदान के तहत भूटान, मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमा, सेशेल्स को कोविड-19 के टीके की आपूर्ति करेगा।
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नेपाल और बांग्लादेश को भेजी गई वैक्सीन की पहली खेप
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बता दें कि भारत की ओर से भेजी गई वैक्सीन बांग्लादेश की राजधानी ढाका पहुंच चुकी है। भारत दुनिया के बड़े टीका निर्माताओं में से एक है और कोरोना वायरस का टीका खरीदने के लिये काफी देशों ने सम्पर्क किया है। ऐसा बताया जाता है कि पाकिस्तान को इसका फायदा नहीं मिलेगा क्योंकि अभी तक इस पड़ोसी देश ने भारत से संपर्क नहीं किया है।
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