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कहां हो रही चूक: ड्रोन से IED और हथियार भेजने का आसान रास्ता बना इंटरनेशनल बॉर्डर, दो साल में 50 ज्यादा मामले

अजय मीनिया, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Thu, 06 Oct 2022 03:58 PM IST
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पाकिस्तानी में बैठे आतंकी जम्मू संभाग में आतंकी माड्यूल तैयार कर रहे हैं। एक पकड़ा जाए तो दूसरा तैयार हो जाता है। इन माड्यूल में शामिल होने वाले आतंकियों तक आसानी से विस्फोटक और हथियार भी पहुंच रहे हैं। इसके लिए सांबा और कठुआ जिला सबसे मुफीद रास्ता बन गया है। जिसका सबसे बड़ा कारण सीमा पार से आने वाले ड्रोन पर नजर रखने में नाकामी है। 

इसके साथ ही इन ड्रोन से आने वाले हथियार और विस्फोटक को रिसीव करने वाले आतंकियों पर नजर न होना है, क्योंकि जम्मू, सांबा और कठुआ सीमावर्ती मैदानी इलाका है। ड्रोन को आने में एक साफ रास्ता मिलता है। ड्रोन से सामान जिस जगह फेंका जाता है, वहां से इसको उठाना भी आसान है। यहीं वजह है कि पिछले दो साल में 40 बार जम्मू, सांबा और कठुआ में ड्रोन के जरिए हथियार और गोला बारूद पहुंचाया गया। यहीं नहीं, आज से 3 साल पहले एनआईए ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को जानकारी दी थी कि कठुआ और सांबा बार्डर से 50 से अधिक आतंकी घुसपैठ कर श्रीनगर तक पहुंचे हैं।

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सांबा के मंगू चक में फिर दिखा ड्रोन
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कब, कहां और क्या गिराया
  • 3 अक्तूबर 2021, फ्लाएं मंडाल, एके 47, तीन नाइट विजन कैमरा
  • 27 जुलाई 2021, अखनूर, 5 किलो आईईडी
  • 20 जून 2022, हीरानगर, अमेरिकी गन, पिस्टल
  • 14 मई 2021, सांबा, एक पिस्टल, एक एके 47
  • 2 जनवरी, 2022, चमलियाल, 4 चाइनीज पिस्टल, हेरोइन
  • 29 मई 2022, हरियाचक कठुआ, यूबीजीएल, स्टिकी बम
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Drone in Samba
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एक आतंकी ने 14 बार ड्रोन से आए हथियार बरामद किए

18 जुलाई 2022 को जम्मू पुलिस ने जम्मू के खटिकां तालाब से फैजल मुनीर नाम के आतंकी को गिरफ्तार किया। उसने पुलिस को बताया कि वह 2 साल में कठुआ क्षेत्र में पाकिस्तान से 14 बार ड्रोन के जरिए स्टिकी बम, गोला बारूद, हथियार, नकदी बरामद कर श्रीनगर और अलग अलग जगहों तक पहुंचा चुका है। अब हाल में उधमपुर में पकड़ा आतंकी असलम शेख भी कठुआ से हथियार लेकर आया है।

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Samba Drone Spotted (File)
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ड्रोन पर लगे कैमरे से बनता है वीडियो

जानकारी के अनुसार ड्रोन से भेजे जाने वाले हथियारों और विस्फोटक के साथ एक कैमरा भी लगा होता है। जीपीएस लगे इस कैमरे से पूरे रूट का वीडियो बन जाता है। यही वीडियो फिर हैंडलर, ओजी वर्कर या आतंकी को जाता है। इसमें बताया जाता है कि कहां पर ड्रोन ने सामान फेंका है और इसे कैस बरामद करना है।

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Drone on LOC
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खुफिया तंत्र नाकाम, रखनी होगी पैनी नजर

इंटरनेशनल बॉर्डर से ड्रोन भेजना और इससे फेंका जाने वाला सामान उठाना एलओसी की तुलना में आसान है। मैदानी इलाके होने की वजह से ड्रोन से फेंके जाने वाले सामान तक पहुंचना भी आसान रहता है। न जाने कितनी जगहों से ड्रोन आ रहे हैं, ऐसे में हर जगह नजर रखना संभव नहीं। पुलिस और खुफिया एजेंसियों को हमारे यहां ही छुपे आतंकी मददगारों पर अधिक नजर रखनी होगी। कहीं न कहीं इन पर नजर रखने में चूक हो रही है। चाहे वो खुफिया तंत्र की कमजोरी हो या फिर पुलिस नेटवर्क की। जिस तरह से क्रॉस बार्डर तस्करी में रहने वालों पर नजर रखी जाती है, ऐसे ही पूर्व आतंकियों और इनके संपर्क में रहने वाले लोगों पर रखनी होगी।   -एसपी वैद, पूर्व डीजीपी।  

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