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Hepatitis B: बेहद खतरनाक है हेपेटाइटिस बी की बीमारी, समझ नहीं आते लक्षण और हो जाती है मौत

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ललित फुलारा Updated Mon, 25 Jul 2022 12:04 PM IST
हेपेटाइटिस बी के मामले भारत में ज्यादा
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28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जा रहा है। हेपेटाइटिस लिवर से जुड़ी बीमारी है, जो संक्रमण, अल्कोहल के अधिक सेवन, कुछ खास दवाओं के अधिक उपयोग और दूषित खान पान से फैलती है। इस बीमारी में लिवर में सूजन आ जाती है। अगर लिवर पर गंभीर प्रभाव पड़ता है तो व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। वैसे तो हेपेटाइटिस से बचाव और इलाज उपलब्ध है, लेकिन हेपेटाइटिस के शुरुआती लक्षण न के बराबर या नजर न आने के कारण खतरा बढ़ सकता है। हेपेटाइटिस को वायरस के आधार पर पांच प्रकार में बांटा जाता है। जिसमें हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई शामिल है। सबसे घातक हेपेटाइटिस बी को माना जाती है। हेपेटाइटिस बी की बीमारी से भारत में हर साल लाखों लोग की मौत हो जाती है। इस बीमारी में सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके लक्षण आसानी से समझ में नहीं आते हैं। हेपेटाइटिस बी एक वायरल इंफेक्शन है जो सीधे लिवर को प्रभावित करता है। इस बीमारी से लिवर में सूजन की समस्या हो जाती है। विकासशील देशों के लिए यह बीमारी एक बहुत ही बड़ा खतरा है। आइए जानते हैं इस बीमारी के बारे में विस्तार से...
हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन मौजूद है
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्ययन के अनुसार, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और थाइलैंड ने हेपेटाइटिस बी को कंट्रोल कर लिया है। लेकिन भारत में अभी यह बीमारी नहीं रुकी है। देश में इस बीमारी से हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। बता दें कि इस बीमारी को रोकने के लिए 1982 से ही वैक्सीन मौजूद है। यह वैक्सीन 95 फीसदी तक इस बीमारी के खतरे को कम कर देती है।
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हेपेटाइटिस बी के लक्षण आसानी से नहीं आते नजर
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हेपेटाइटिस बी की बीमारी के लक्षण को आसानी से समझना आसान नही है। इस बीमारी के शुरआती दौर में थकान, खुलकर भूख न लगना, उल्टी आना, पेट दर्द, सिर दर्द, आंखों में पीलापन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इस बीमारी से लिवर संक्रमित हो जाता है और लिवर में सूजन की समस्या हो जाती है। कुछ लोगों का लिवर काम करना एकदम बंद कर देता है जिससे मौत हो जाती है।
हेपेटाइटिस सी वैक्सीन
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हेपेटाइटिस बी एक संक्रमित बीमारी है। इसके वायरस किसी संक्रमित बीमारी के संपर्क में आने से फैलते हैं। यह वायरस इतने शक्तिशाली होते हैं जो आसानी से मरते नहीं हैं और बहुत तेजी से बढ़ते जाते हैं। इसके वायरस शरीर के बाहर भी महीनों जिंदा रह सकते हैं।

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नोट: ये लेख सीनियर गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. गौरव चावला से सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।
 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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