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सेहत की बात: बच्चों-युवाओं में बढ़ रही है मायोपिया की दिक्कत, इस गड़बड़ आदत ने बढ़ा दिया है खतरा

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 25 Nov 2022 04:05 PM IST
मायोपिया की समस्या और इसके कारण
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आंखों की समस्याओं को सिर्फ उम्र के साथ होने वाली दिक्कत मानने की गलती न करें, हाल के वर्षों में कम उम्र के लोग भी इससे संबंधित कई प्रकार के विकारों के शिकार हो रहे हैं। मायोपिया, आंखों की ऐसी ही एक समस्या है जिसके शिकार बच्चे-युवा भी तेजी से होते जा रहे हैं। लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, विशेषतौर पर कंप्यूटर और मोबाइल के स्क्रीन पर लंबे समय तक देखते रहने की आदत इस समस्या के जोखिम को बढ़ाती जा रही है।

मायोपिया आमतौर पर बचपन और किशोरावस्था के दौरान विकसित हो सकती है, 20 और 40 की उम्र के बीच वाले लोगों में इसका जोखिम अधिक देखा गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, निकट दृष्टिदोष (मायोपिया) एक सामान्य दृष्टि से संबंधित विकार है जिसमें निकट की वस्तुएं  तो स्पष्ट दिखाई देती हैं, लेकिन दूर की चीजें धुंधली दिखाई देने लगती हैं। प्रकाश किरणों के गलत तरीके से अपवर्तित होने का कारण इस विकार को जोखिम होता है। दृष्टि सही होने के लिए प्रकाश की किरणों को आंखों के पीछे तंत्रिका ऊतकों (रेटिना) पर केंद्रित होनी चाहिए, हालांकि इस स्थिति में यह रेटिना के सामने केंद्रित होने लगती है। डॉक्टर कहते हैं, आनुवांशिकी के अलावा आंखों की इस तरह की दिक्कतों के लिए लाइफस्टाइल को प्रमुख कारक माना जाता है, सभी लोगों को इससे बचाव करते रहना चाहिए।
मायोपिया का खतरा
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मायोपिया के लक्षण कैसे होते हैं?

मायोपिया की स्थिति में दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देने लगती हैं। चीजों को सही तरीके से देखने के लिए आपको आंशिक रूप से पलकें बंद करने की आवश्यकता हो सकती है। आंखों की इस प्रकार की समस्या में अक्सर सिर दर्द, आंखों में दर्द बनी रहती है। इस तरह की दिक्कतें महसूस होती हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करके इसका समय रहते इलाज प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है।
  • दूर की वस्तुओं को पहचानने में दिक्कत।
  • जरूरत से ज्यादा पलकें झपकना।
  • कम रोशनी में चीजों को स्पष्ट न देख पाना।
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स्क्रीन टाइम बढ़ने का खतरा
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स्क्रीन टाइम बढ़ना इस समस्या का कारक

अध्ययनों से पता चला है कि जो बच्चे लंबे समय तक कंप्यूटर या स्मार्टफोन का उपयोग करते रहते हैं, उनमें निकट दृष्टिदोष विकसित होने का अधिक जोखिम होता है। बढ़ा हुआ स्क्रीन टाइम मायोपिया के अलावा भी आंखों को कई प्रकार से प्रभावित कर सकता है। इसके अधिक उपयोग के कारण आंखों में जलन, लालिमा, धुंधली दृष्टि जैसी दिक्कतें होने का खतरा अधिक रहता है। डॉक्टर मोबाइल-कंप्यूटर पर अधिक समय बिताने से रोकते हैं।
मायोपिया का खतरा
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मायोपिया के जोखिम को कैसे कम करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, निकट दृष्टिदोष के जोखिम को कम करने के लिए बच्चों को घर से बाहर अधिक खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। घर के अंदर के समय को बाहर के समय के साथ संतुलित करना बच्चे के स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के लिए फायदेमंद होता है। बाहर का समय निकट दृष्टिदोष से बचाव करता है और आंखों के स्वास्थ्य के लिए एक अच्छा नुस्खा है। आंखों को स्वस्थ रखने के लिए हरियाली देखने को ज्यादा लाभकारी माना जाता है।
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आंखों की नियमित जांच जरूरी
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आंखों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

मायोपिया जैसे विकारों से बचाव करने और आंखों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए दिनचर्या में कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है। 
  • आंखों की नियमित जांच कराएं।
  • अपनी आंखों को धूप से बचाएं।
  • खेल या काम के दौरान सुरक्षात्मक आईवियर पहनें, जिससे आंखों में चोट लग सकती है।
  • पढ़ते और काम करते समय अच्छी रोशनी का प्रयोग करें।
  • कंप्यूटर या अन्य स्क्रीन पर 20 मिनट तक देखने के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी चीज को देखना चाहिए।
  • स्वस्थ भोजन और नियमित व्यायाम करें।
  • उच्च रक्तचाप या मधुमेह जैसी स्वास्थ्य स्थितियों को नियंत्रित करें, ये आपकी दृष्टि को प्रभावित कर सकती हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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