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Myths & Facts: क्या सिर्फ धूम्रपान से ही होता है फेफड़ों का कैंसर? जानिए इस गंभीर रोग के बारे में जरूरी बातें

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 27 Nov 2022 03:53 PM IST
लंग कैंसर के जोखिम कारक
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फेफड़ों का कैंसर वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के आंकड़ों के मुताबिक साल 2022 में यूनाइटेड स्टेट्स में लंग कैंसर के कारण 1.30 लाख लोगों की मौत हुई, इनमें महिला-पुरुषों का अनुपात लगभग बराबर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो इस कैंसर का खतरा 65 साल से अधिक उम्र के लोगों में अधिक देखा जाता रहा है पर 45 से कम आयु वालों में भी इसके मामले बढ़ते देखे जा रहे हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिसपर सभी लोगों को विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आमतौर पर माना जाता है कि लंग कैंसर सिर्फ धूम्रपान करने वालों में ही होता है पर यह पूरी तरह सही नहीं है, कई और कारण भी इसके जोखिम को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। किसी भी रोग से बचाव के लिए आवश्यक है कि उसके बारे में सही जानकारी होना।

लंग कैंसर को लेकर लोगों में कई प्रकार के भ्रम देखे जा रहे हैं। आइए इससे जुड़ी सच्चाइयों के बारे में विस्तार से जानते हैं। सही जानकारी और बचाव के माध्यम से  फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। 
धुम्रपान से फेफड़ों को खतरा
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मिथ 1: सिर्फ धूम्रपान करने से ही होता है लंग कैंसर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह सही है कि धूम्रपान की आदत को लंग कैंसर को प्रमुख कारकों में से एक माना जाता है, पर सिर्फ इसी वजह से फेफड़ों का कैंसर होता है, यह सही नहीं है। प्रदूषण और सेकेंड हैंड धूम्रपान, कैंसर की फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों में भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा देखा गया है। धूम्रपान न करने के साथ प्रदूषण और लाइफस्टाइल संबधी कारकों से बचाव करना भी जरूरी होता है।
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लंग्स की समस्या
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मिथ 2- फेफड़ों के कैंसर का मतलब मौत

फेफड़ों के कैंसर को घातक माना जाता है, पर इसका समय पर निदान और इलाज होने से जीवन प्रत्याशा को बढ़ाया जा सकता है। समय पर इलाज के साथ पुरुषों के लिए अगले 5 साल की जीवित रहने की दर 18% और महिलाओं के लिए 25% है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को फेफड़ों को स्वस्थ रखने और इससे संबधित लक्षणों पर विशेष ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं।
फेफड़ों की बीमारियां और बचाव
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मिथ 3- केवल बुजुर्गों को ही होता है फेफड़ों का कैंसर

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के विशेषज्ञ बताते हैं, वैसे तो फेफड़ों के कैंसर का खतरा 65 साल से अधिक आयु के लोगों में अधिक होता है पर कुछ कारकों के चलते वयस्कों में भी इसका जोखिम बढ़ रहा है। ऐसे में इसे सिर्फ उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या के तौर पर देखना सही नहीं है। कैंसर के जोखिम कारकों पर ध्यान देते हुए कम उम्र से ही इससे बचाव के उपाय शुरू कर देने चाहिए। कुछ जन्मजात कारकों के चलते बच्चे भी इसके शिकार हो सकते हैं।
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फेफड़ों की बीमारियों से बचाव
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मिथ 4- लंग कैंसर से बचना मुश्किल है।
 
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जीवनशैली और आहार को ठीक रखकर कई गंभीर प्रकार के रोगों से बचाव किया जा सकता है, लंग कैंसर को जोखिम को कम करने में भी इसके लाभ हो सकते हैं। उचित मात्रा में ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज के सेवन के साथ सांस वाले अभ्यास की आदत फेफड़ों को स्वस्थ रखने और इससे संबंधित बीमारियों से बचाने में मददगार है। एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटीकैंसर गुणों वाले फलों का सेवन करना आपको कई प्रकार के कैंसर से बचाने में सहायक है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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