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Yoga Tips: 'लॉन्ग सिटिंग जॉब' के कारण बढ़ रही हैं रीढ़ की दिक्कतें, उष्ट्रासन योग से पा सकते हैं इसमें लाभ

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 08 Dec 2022 03:38 PM IST
लॉग सिटिंग जॉब्स के कारण होने वाली दिक्कतें
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लॉग सिटिंग जॉब्स यानी ऑफिस में 6-8 घंटे तक बैठे रहने के कारण शरीर के पोस्चर से संबंधित विकारों का जोखिम काफी बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। यह रीढ़ की समस्याओं का कारण बनती है जिससे पीठ में दर्द और मांसपेशियों से संबंधित कई प्रकार की अन्य जटिलताओं का खतरा भी बढ़ जाता है। लॉग सिटिंग जॉब्स, सेंडेंटरी लाइफस्टाइल को भी बढ़ाने वाली मानी जाती है, जिसे विशेषज्ञ काफी समस्याकारक मानते हैं। इस तरह की दिक्कतों के जोखिम को कम करने के लिए योगासनों का अभ्यास एक बेहतर विकल्प हो सकता है। विशेषज्ञ रीढ़ की दिक्कतों को दूर करने के लिए कैमल पोज (उष्ट्रासन) योग के अभ्यास की सलाह देते हैं।

योग विशेषज्ञ बताते हैं, उष्ट्रासन मध्यवर्ती स्तर का बैक-बेंडिंग योगाभ्यास है जिसे अनाहत (हृदय चक्र) को खोलने के लिए जाना जाता है। यह योग शरीर में लचीलापन और ताकत को बढ़ाने के साथ बेहतर स्ट्रेचिंग करने, पाचन में सुधार करने और पीठ के दर्द में राहत पाने के लिए फायदेमंद माना जाता है।

आइए इस योग को करने के तरीके और इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में जानते हैं।
उष्ट्रासन योग कैसे किया जाता है?
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उष्ट्रासन योग का अभ्यास कैसे किया जाता है?

उष्ट्रासन योग हर आयु के लोगों के लिए लाभकारी हो सकता है। हालांकि इसके सुरक्षित अभ्यास के लिए आपको विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। इस योग को करने के लिए सबसे पहले घुटनों के बल बैठ जाएं। अब सांस लेते हुए रीढ़ के निचली हिस्से को आगे की तरफ जाने का दबाव डालें। इस दौरान पूरा दबाव नाभि पर महसूस होना चाहिए। अपनी पीठ को पीछे की तरफ मोड़ते हुए झुकें। गर्दन को ढीला छोड़ दें। इस स्थिति में 30 से 60 सेकेंड तक बने रहें। किसी विशेषज्ञ की निगरानी में इस योग को करने की सलाह दी जाती है।
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उष्ट्रासन योग से होने वाले लाभ
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उष्ट्रासन योग से होने वाले स्वास्थ्य लाभ

उष्ट्रासन योग के कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं, इसे रीढ़ और पीठ की समस्याओं को दूर करने में विशेष लाभकारी माना जाता है। रीढ़ को सीधा रखने के अलावा पीठ के निचले हिस्से में दर्द की समस्या को दूर करने में इस योग के विशेष लाभ हो सकते हैं। यह आसन पाचन में सुधार करता है। शरीर की बेहतर स्ट्रेचिंग के साथ पीठ और कंधों को भी मजबूत बनाने में भी इस योग के अभ्यास के लाभ हैं।

जिन लोगों को शरीर के निचले हिस्से, विशेषकर पीठ में दर्द रहता है, उन्हें इस योग से लाभ मिल सकता है। मासिक धर्म की परेशानियों को दूर करने में भी यह मदद करता है।
उष्ट्रासन योग की सावधानियां
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ये सावधानियां भी जरूरी

उष्ट्रासन योग संपूर्ण शरीर के लिए वैसे तो विशेष लाभकारी है, पर इससे संबंधित कुछ सावधानियों का ध्यान रखना भी बहुत आवश्यक माना जाता है। जिन लोगों को पीठ या गर्दन में चोट या गंभीर दर्द हो, रक्तचाप की समस्या बनी रहती है, ऐसे लोगों को इस योग को न करने की सलाह दी जाती है। उष्ट्रासन योग को गर्भावस्था में भी नहीं करना चाहिए। यदि हाल ही में आपकी पेट की सर्जरी हुई है तो भी इस योग को न करने की सलाह दी जाती है। 



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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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