गरुड़ पुराण: भूलकर भी नहीं करना चाहिए इन लोगों के घरों का भोजन, झेलनी पड़ती हैं परेशानियां

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: शशि सिंह Updated Thu, 07 Oct 2021 02:37 PM IST
गरुड़ पुराण (प्रतीकात्मक तस्वीर)
गरुड़ पुराण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : google
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गरुण पुराड़ 18 पुराणों में से एक है। इसके अधिष्ठातृ देव श्री हरि नारायण हैं। इस पुराण में जन्म से लेकर मृत्यु के बाद तक की नीतियों के बारे में विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। किसी मनुष्य की मृत्यु के बात गरुड़ पुराण पड़ने का विधान हैं। इसमें कई ऐसी बातों का जिक्र मिलता है जो मनुष्य को मुक्ति दिलाने में सहायक हैं। गरुड़ पुराण में ऐसी बातों का वर्णन भी किया गया है, जिन्हें अपने जीवन में अपनाकर जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है और व्यक्ति कई समस्याओं से स्वंय को बचा सकता है। गरुड़ पुराण में कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताया गया है जिनके घर भूलकर भी भोजन नहीं करना चाहिए अन्यथा आपको मान-सम्मान की हानि के साथ अन्य समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में।
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चोर या अपराधी व्यक्ति
गरुड़ पुराण कहता है कि चोर या अपराधी व्यक्ति के घर का भोजन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इससे हम भी उसके पाप के भागीदार बन सकते हैं, साथ ही हमारे विचार भी उन्हीं की भांति दूषित हो जाते हैं। इससे आपको एक न एक दिन मान-सम्मान की हानि और समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

सूद कमाने वाला व्यक्ति
गरुड़ पुराण कहता है कि गलत तरह से कमाया गया धन सदैव अशुभ फल प्रदान करता है। हमें कभी भी ऐसे व्यक्ति के घर का भोजन नहीं करना चाहिए,जिसके यहां पर किसी अन्य मजबूर व्यक्ति से धन कमाया गया हो। 

नशे का कारोबार करने वाला व्यक्ति
गरुड़ पुराण के अनुसार जो लोग नशे का कारोबार करते हैं उनके घर में जाना या फिर भोजन करना आपको भी पापा का भागीदार बनाता है। ऐसे लोग दूसरों के लिए तो मुश्किलें खड़ी करते ही हैं साथ ही में ये अपने परिवार के लिए भी दुख का कारण होते हैं। ऐसे व्यक्ति के घर में कदम रखना भी पाप के समान होता है।

चरित्रहीन स्त्री
एक स्त्री के लिए उसका चरित्र ही सबसे बड़ी पूंजी होता है। गरुड़ पुराण कहता है कि जिस स्त्री का चरित्र खराब हो भूलकर भी उसके घर का भोजन नहीं करना चाहिए और न ही कभी ऐसे घर में कदम रखना चाहिए। इससे आपके मान-सम्मान को भी हानि हो सकती है। 
 

क्रोधी व्यक्ति
जो जैसा खात है अन्न, उसका वैसा ही रहता है मन। यह कहावत हम अपने बुजुर्गों के मुंह से हमेशा सुनते चले आ रहे हैं। जो व्यक्ति जैसा भोजन करता है उसका मन भी वैसा ही हो जाता है, इसलिए कभी भी क्रोधी व्यक्ति के घर का भोजन नहीं करना चाहिए।

रोगी व्यक्ति
यदि कोई अत्यधिक बीमार रहता हो या फिर उस समय रोग की अवस्था में हो तो उसके यहां का भोजन नहीं करना चाहिए, दरअसल यह आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
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