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विरासत: भगवान परशुराम की जन्मस्थली जानापाव

29 November 2022

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पहाड़ी पर बना मंदिर, ऊबड़-खाबड़ रास्ते, नाले, घनी झाडियां और जंगली जानवरों का डर, यह सब पार करने के बाद पहुंचते हैं जानापाव। जहां पहुंचते ही आप इन सारी समस्याओं को भूल जाते हैं।   

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मेरठ में घटित हुई10 मई की क्रांति की घटना सिर्फ भारत के लिए ही ऐतिहासिक नहीं थी, इसका असर विश्व पटल पर भी पड़ा था। मेरठ से शुरू हुई क्रांति विदेशी अखबारों में सुर्खिंया बनी थी।  

अक्षरधाम मंदिर न केवल दिल्ली बल्कि दुनिया के सबसे खूबसूरत जगहों में आता है। इतने बड़ी संरचना से जुड़ी कई दिलचस्प बातें हैं, जिनके बारे में आपने शायद ही सुना होगा।

जब-जब भारत की बात होती है... तो दिल्ली के इंडिया गेट के अलावा अगर किसी जगह की तस्वीर सामने आती है तो वो है मुम्बई के मरीन ड्राईव, गेटवे ऑफ इंडिया साथ ही वो दो होटल्स जो आज भी शान से भारत की इस आर्थिक राजधानी की पहचान है... हम बात कर रहे हैं मुम्बई की शान ताज पैलेस होटल की.. 
 

तुगलकाबाद किला नई दिल्ली में एक मील का पत्थर है जिसे 1321 में दिल्ली सल्तनत के प्रसिद्ध तुगलक राजवंश के संस्थापक गयास-उद-दीन तुगलक ने 1321 में बनवाया था

राजस्थान में मौजूद कई खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतें और किले केवल देश के लोगों में ही नहीं विदेश पर्यटकों में भी काफी मशहूर हैं। यहां के हर एक जिले में आपको एक से एक ऐतिहासिक फोर्ट देखने को मिल जाएंगे, जो काफी गर्व के साथ खड़े हुए हैं।
 

सर्दियों में सैर करने के लिए जहां बहुत से लोग बर्फबारी देखने के लिए पहाड़ों का रुख करते हैं। वहीं बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो ठिठूरन भरे मौसम में किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं जहां का मौसम सुहावना हो, और अडूर एक शानदार जगह है। 

भारत में वैसे तो कई प्रसिद्ध प्राचीन और रहस्यमय मंदिर है, उत्तराखंड के धारी देवी मंदिर एक बहुत ही प्राचीन और रहस्यमय मंदिर है, जहां पर स्थापित मां की मूर्ति दिन में तीन बार रूप बदलती हैं। 
 

मंदाकिनी नदी के तट पर बसा चित्रकूट धाम भारत के सबसे प्राचीन तीर्थस्थलों में एक है। कहते है यहां भगवान राम ने 14 साल के वनवास के दौरान माता सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ 11 साल 11 महीने 11 दिन बिताए थे।
 

लोथल उस भारत का चिन्ह है जिस काल में भारतीय उपमहाद्वीप में बहती सरस्वती नदी के किनारे पर मानव जीवन का वास हुआ करता था। जिसके प्रमाण आज भी सरस्वती नदी और उसकी उप-नदियों के आस-पास बिखरे अवशेषों के रूप में पाए जाते हैं।

रावण का दहन और रामलीला का आयोजन यहां अनिष्ट का प्रतीक माना जाता है। गांव के लोग बताते है कि करीब 60 साल पहले यहां रामलीला मंचन का प्रयास किया गया। इस दौरान गांव में एक व्यक्ति की मौत हो गई।
 

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