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प्रलय: जब भारत में पहली बार हुआ आपदा प्रबंधन

9 December 2022

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5:20
ये बात है 142 साल पुरानी है... नैनीताल का मल्लीताल आज जैसा दिखता है, शायद वो कभी वैसा था नहीं. 18 सितंबर,1880 का वो दिन नैनीताल के इतिहास में सबसे दर्दनाक दिनों में से एक था, जिसके बारे में लोग आज भी सोचते हैं तो कांप उठते हैं।  

प्रलय: जब भारत में पहली बार हुआ आपदा प्रबंधन

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सभी 49 एपिसोड

26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में आई सूनामी लहर ने भारत समेत दुनिया के कई देशों में भारी तबाही मचाई थी. इस त्रासदी ने इतिहास के पन्नों पर ऐसा खौफ पैदा किया कि सूनामी का नाम सुनते ही लोगों में दहशत फैल जाती है।
 

ये हादसा इसलिए भी आज तक याद किया जाता है क्योंकि अंतरिक्षयान के बेस से उड़ान भरने के समय वहां टेलीविजन स्टेशंस के कई दल मौजूद थे. इस घटना और इससे जुड़े सभी दृश्यों का सीधा प्रसारण टेलीविजन पर हो रहा था।

चीन में विदेशी शक्तियों का बढ़ता प्रभाव देखकर चीन के जनमानस में असंतोष उभरने लगी. वो किसी भी हालत में चीन की सत्ता और देश की स्थिति में बदलाव चाहने लगे

अंदाजा लगाइए कि एक देश है....जिसके चारों तरफ सिर्फ पानी है... और जब-तब कई नाव उसके किनारे से आके टकराऐं.... जिनमें केवल मानव अंग और कंकाल.... सुनिए कहानी रहस्यमयी 'घोस्ट बोट' की
 

लगभग 1.28 करोड़ रुपये मूल्य के पन्ना, नीलम और माणिक के साथ धातु का डिब्बा एयर इंडिया की फ्लाइट 101 के मलबे में मिला था. बॉक्स पर एयर इंडिया का लोगो था।
 

क्या बच्चें क्या बूढ़े... हर किसी ने इस सूखे का प्रकोप झेला... 74 साल पहले बंगाल यानी, मौजूदा बांग्लादेश, ने अकाल का वो भयानक दौर देखा था, जिसमें करीब 30 लाख लोगों ने भूख से तड़पकर अपनी जान दे दी थी।

2 जून 1692 को ब्रिजेट बिशप नाम की महिला को इस आरोप में पहली फांसी हुई, और अगले एक साल तक कुछ 19 लोगों को डायन बताकर फांसी पर लटका दिया गया। 

आज से 43 साल पहले 18 नवंबर को दक्षिण अमेरिका के गुयाना के जोन्सटाउन में 900 से अधिक लोगों ने सामूहिक आत्महत्या कर ली थी, ये सभी एक धार्मिक पंथ पीपल्स टेंपल ग्रुप को मानने वाले थे। 

एवरेस्ट इंसानों के लिए सदियों तक एक चुनौती बना रहा। धरती का ये सबसे ऊंचा शिखर असल में कई लोगों को मौत की चपेट में ले चुका है। 

महज़ कुछ सेकंड्स में दर्जनों लोगों को काटते-कुचलते हुए ट्रेन गुज़र गई. कुछ देर पहले तक जो लोग हंसते-मुस्कुराते, तालियां बजाते रावण दहन देख रहे थे, उनमें से कई अब निर्जीव हालत में पटरियों पर बिखरे पड़े थे.... 

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