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कोरोना: राजस्थान हाईकोर्ट ने टीकों के अलग-अलग दाम पर केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब

राजस्थान हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और राज्य सरकार से कोरोना के टीकों की अलग-अलग कीमतों को चुनौती देने वाली याचिका पर 24 मई तक जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार राज्यों और निजी अस्पतालों के लिए टीकों की खरीद के लिए घोषित अलग-अलग कीमतों ने नागरिकों के मौलिक और सांविधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया।

पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित कोविशील्ड की कीमत केंद्र के लिए 150 रुपये, राज्यों के लिए 400 रुपये और निजी अस्पतालों के लिए 600 रुपये है। वहीं, हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक के कोवाक्सिन की कीमत केंद्र के लिए 150 रुपये, राज्य सरकारों के लिए 600 रुपये और निजी अस्पतालों के लिए 1,200 रुपये है। दोनों टीकों को दो खुराक में दिया जाता है।
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जोधपुर: कोरोना संक्रमित आसाराम की तबीयत बिगड़ी, आईसीयू में कराया गया भर्ती

राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद आसाराम की तबीयत बिगड़ गई है। उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया है। बता दें कि नाबालिग के यौन शोषण मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा आसाराम भी कोरोना की चपेट में आ चुका है। कुछ दिन पहले उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद उसका इलाज जेल में ही चल रहा था। बताया जा रहा है कि बुधवार (5 मई) की रात उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह अभी आईसीयू में भर्ती है। 

आसाराम समेत 12 कैदी संक्रमित
जानकारी के मुताबिक, जोधपुर जेल में बंद रेप के दोषी आसाराम की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उसे महात्मा गांधी अस्पताल के कोविड सेंटर भर्ती कराया गया। आसाराम ने बेचैनी होने की शिकायत की थी। फिलहाल उसका इलाज जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है। गौरतलब है कि बीते दिनों आसाराम जेल के 12 अन्य कैदियों के साथ संक्रमित पाया गया। 

फरवरी में भी बिगड़ी थी तबीयत
बता दें कि फरवरी 2021 में भी आसाराम को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस वक्त उसने सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायत की थी। गौरतलब है कि एससी-एसटी कोर्ट ने 25 अप्रैल 2018 को यौन उत्पीड़न के मामले में आसाराम को दोषी ठहराया था। साथ ही, आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 
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इंतजाम: ऑक्सीजन-बेड नहीं मिल रहे, लेकिन राजस्थान सरकार कराएगी मुफ्त अंतिम संस्कार

कोरोना काल में राज्य सरकार मरीजों को ऑक्सीजन, बेड या दवा तो मुहैया नहींं करा पा रही है, लेकिन शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए अलग से व्यवस्था जरूर बना दी है। राजस्थान सरकार ने पूरे प्रदेश में एक नया फरमान जारी किया है कि कोरोना संक्रमितों के अंतिम संस्कार का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार जो फंड अंतिम संस्कार के लिए जारी कर रही है, उससे तो मरीजों की जान बचाई जा सकती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि अंतिम संस्कार के लिए सरकार पूरा खर्च उठाएगी। साथ ही शव को अस्पताल से श्मशान-कब्रिस्तान ले जाने के लिए मुफ्त एंबुलेंस या वाहन की सुविधा भी देगी। सीएम गहलोत ने व्यवस्था तुरंत प्रभाव से लागू करने के भी निर्देश दिए हैं। 

मुफ्त वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश
दरअसल, जोधपुर उत्तर नगर निगम की ओर से यह व्यवस्था लागू की गई । जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सभी कलेक्टरों, शहरी निकायों और अस्पतालों को निर्देश जारी किए हैं। शवों का अस्पताल या घर से श्मशान, कब्रिस्तान तक सम्मानपूर्वक परिवहन सुनिश्चित किया जाए। अस्पताल से पार्थिव देह ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिले तो ऐसी हालत में जिला परिवहन अधिकारी वाहनों का अधिग्रहण करवाकर व्यवस्था करने में सहयोग करे।   मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि पूरे प्रदेश में इस व्यवस्था के बारे में प्रचार प्रसार करने के लिए शहरी निकायों के कंट्रोल रूम को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कंट्रोल रूम से मिलेगी एंबुलेंस
कंट्रोल रूम को इसके लिए टोल फ्री नंबर भी जारी करने को कहा गया है। पार्थिव देह को निशुल्क ले जाने के लिए वाहन या एंबुलेंस की व्यवस्था शहरी निकाय के कंट्रोल रूम के अधीन रहेगी। कंट्रोल रूम में एंबुलेंस के लिए कॉल आने पर उसका पूरा ब्योरा दर्ज कर किया जाएगा। बता दें कि राजस्थान में कोरोना की रफ्तार तेज है। शनिवार को यहां पर कोरोना से 70 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। जबकि करीब 6 हजार नए मामले सामने आए हैं। सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि जल्द ही इसे काबू कर लिया जाएगा। 
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महिला विधायक ने थाने में काटा बवाल, वायरल हुआ वीडियो

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जोधपुर: रेल मंत्री वैष्णव बोले- 300 स्टेशन हाई स्पीड कॉरिडोर से जुड़ेंगे, 150 का होगा पुनर्विकास

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को जोधपुर में कहा कि देश के 150 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जाएगा, जबकि 300 स्टेशनों को हाई स्पीड कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। वैष्णव ने यह बात जोधपुर में रेलवे स्टेशन पर एक भवन के शिलान्यास समारोह के दौरान संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है और इसके साथ ही मेरे पिता ने भी मेरे द्वारा हर यात्री के चेहरे पर मुस्कान लाने की कामना की है। उन्होंने कहा कि मैं दोनों की उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करूंगा।

बता दें कि रेल मंत्री का पदभार संभालने के बाद वैष्णव का यह पहला जोधपुर दौरा था। उन्होंने कहा कि पूरे देश में 150 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जाएगा, जिनमें से राजस्थान के आठ स्टेशनों को पहले चरण में विकसित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि राज्य में पुनर्विकास के लिए आठ स्टेशन जयपुर, गांधीनगर (जयपुर), जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, जैसलमेर, बीकानेर और आबू रोड (सिरोही) हैं। उन्होंने आगे कहा कि 300 स्टेशनों को हाई स्पीड कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा।

उन्होंने कहा कि रेल लाइनों के विद्युतीकरण का काम तेज गति से चल रहा है और इसे अगले डेढ़ साल में पूरा कर लिया जाएगा। विद्युतीकरण से आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने में मदद मिलेगी।
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सेहत में सुधार: अशोक गहलोत अस्पताल से हुए डिस्चार्ज, डॉक्टर्स ने कुछ दिन आराम करने की सलाह दी

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को आज अस्पताल से छुट्टी मिल गई। फिलहाल वह स्वस्थ्य महसूस कर रहे हैं। शुक्रवार को सीने में तेज दर्द होने के बाद अशोक गहलोत जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती हुए थे। एंजियोप्लास्टी सर्जरी होने के बाद रविवार को उन्हें डिस्चार्ज किया गया। अशोक गहलोत की एंजियोप्लास्टी के बाद की सारी जांच रिपोर्ट सामान्य आई थी। एंजियोप्लास्टी के बाद गहलोत की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है। डॉक्टर्स ने उन्हें कुछ दिन और आराम करने की सलाह दी है।

आज सुबह सवाई मानसिंह अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा, मुख्यमंत्री के पुत्र और आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत, मेडिक कॉलेज प्राचार्य डॉ सुधीर भंडारी, अस्पताल अधीक्षक डॉ राजेश शर्मा सहित मेडिकल बोर्ड के सदस्यों ने मुख्यमंत्री की जांच रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की फिर डिस्चार्ज करने का फैसला लिया गया। पोती कास्वनी ने सीएम अशोक गहलोत को अस्पताल में तिलक लगाकर कलावा बांधा।
 
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा और उनके वैभव गहलोत मोती डूंगरी गणेश जी मंदिर में पहुंचे। यहां मंदिर महंत कैलाश चंद शर्मा ने उन्हें पूजा-अर्चना करवाई।

डॉक्टर की सलाह नहीं मानने से बढ़ी परेशानी- गहलोत
एंजियोप्लास्टी होने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि, मेरे कोविड होने से पूर्व मुझे हार्ट संबंधी कोई भी समस्या नहीं थी। डॉक्टरों के मुताबिक यह पोस्ट कोविड इफेक्ट है। मुझे कोविड से ठीक हुए तीन महीने से अधिक हो चुके हैं। कोरोना पॉजिटिव होते हुए भी मैं लगातार दिन-रात काम करता रहा , जबकि डॉक्टरों ने आराम करने की सलाह दी थी। डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक ठीक तरह से आराम नहीं कर सका, इसी का नतीजा है कि मुझे इतने लंबे समय से पोस्ट कोविड समस्याएं हो रही हैं।
 
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भंड़ाफोड़: दो लाख लेकर शादी करवाती थी गिरोह की सरगना, दो दिन बाद ही दूल्हे को छोड़ कुंवारे की तलाश में जुट जाती

राजस्थान के चितौड़गढ़ में एक लड़की पैसों के लिए एक या दो शादियां नहीं बल्कि दर्जनों शादियां कर चुकी हैं, लेकिन इस बात की भनक उसकी मां को भी नहीं लगी। मां को ऐसा लगा कि उसकी बेटी को किसी ने बेच दिया। मां ने पीड़ित समझकर थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने जब जांच शुरू की तो बेटी का असली चेहरा बेनकाब हो गया। बेटी पीड़ित नहीं आरोपी निकली। बल्कि फर्जी शादी करने वाली युवतियों के गिरोह का मास्टरमाइंड निकली। जो मोटी रकम ऐंठने के लिए अब तक कई शादियां कर चुकी थी और मौका पाकर दूल्हे को छोड़ भाग आती थी, फिर अपने गिरोह के साथ अगले कुंवारे लड़कों की तलाश में जुट जाती थी। 

मां ने महिलाओं के खिलाफ पुलिस में की थी शिकायत
दरअसल, लड़की की मां को पता चला कि बेटी दो महिलाओं के साथ घर से कहीं चली गई हैं। इस बार कई दिन तक नहीं आई तो उसने लौटने पर 20 अगस्त को बेटी नेहा से पूछा कि इतने दिनों तक कहां थी तो नेहा ने मां को बताया कि वह सीमा शेख के साथ गांव से चित्तौडगढ़ घूमने गई थी। उसके बाद सीमा शेख की सहेली सपना खटीक के यहां गई। जहां पर सीमा शेख, सपना खटीक, साबिर खान निवासी नीमच ने उसकी लड़की नेहा कश्यप का फर्जी आधार कार्ड बनाकर एमपी के जारड़ा निवासी जयराम के हाथों पैसे लेकर बेच दिया। लड़की की आपबीती पर उसकी मां ने पुलिस में महिलाओं के खिलाफ बेचने की शिकायत दर्ज करवा दी। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी।

गिरोह की सरगना निकली लड़की
पुलिस जांच में सामने आया कि नेहा ने जिनके खिलाफ जानकारी दी थी, वे सभी गिरोह के सदस्य हैं और नेहा खुद उस गिरोह की सरगना। जांच में पता चला कि सीमा शेख, सपना खटीक, साबिर खान का एक गिरोह है। यह गिरोह लोगों को झांसे में लेकर इसी लड़की से शादी करा देते हैं। चूंकि इस केस में रकम पहले ही ली जा चुकी होती है, इसलिए शादी के बाद यह लड़की एक-दो दिन में ही यहां से भाग निकलने की तैयारी कर लेती है।
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कमाल की तकनीक: देश के लड़ाकू विमानों को दुश्मन के रडारों-मिसाइलों बचाएगी शाफ

सांकेतिक तस्वीर
आधुनिक शाफ तकनीक भारतीय वायुसेना के लड़ाकू जेट विमानों को दुश्मन के इंफ्रारेड, राडार व मिसाइलों के खतरों से बचाने में काम आएगी। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की पुणे स्थित हाई एनर्जी मटीरियल्स रिसर्च लैबोरेट्री व जोधपुर की रक्षा प्रयोगशाला ने विकसित किया है।

रक्षा प्रयोगशाला जोधपुर के निदेशक रवींद्र कुमार ने तकनीक के बारे में बताया, आज के युग में इलेक्ट्रॉनिक रणनीति का दायरा लगातार बढ़ रहा है। महंगे लड़ाकू जेट विमानों को इनसे बचाना महत्वपूर्ण हो गया है। इस शाफ तकनीक को रक्षा उद्योगों को दिया जा रहा है, ताकि भारतीय वायुसेना में इनकी बढ़ी हुई मांग को समय से पूरा किया जा सके।

जोधपुर। आधुनिक शाफ तकनीक भारतीय वायुसेना के लड़ाकू जेट विमानों को दुश्मन के इंफ्रारेड, राडार व मिसाइलों के खतरों से बचाने में काम आएगी। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की पुणे स्थित हाई एनर्जी मटीरियल्स रिसर्च लैबोरेट्री व जोधपुर की रक्षा प्रयोगशाला ने विकसित किया है।

रक्षा प्रयोगशाला जोधपुर के निदेशक रवींद्र कुमार ने तकनीक के बारे में बताया, आज के युग में इलेक्ट्रॉनिक रणनीति का दायरा लगातार बढ़ रहा है। महंगे लड़ाकू जेट विमानों को इनसे बचाना महत्वपूर्ण हो गया है। इस शाफ तकनीक को रक्षा उद्योगों को दिया जा रहा है, ताकि भारतीय वायुसेना में इनकी बढ़ी हुई मांग को समय से पूरा किया जा सके।
  • शाफ तकनीक में कार्ट्रिज (छोटी ट्यूब के आकार के सख्त प्लास्टिक खोल) इस्तेमाल होते हैं।
  • कार्ट्रिज में विस्फोटक भरा होता है। इनका उपयोग विमान को दुश्मन की राडार द्वारा पहचानने से रोकने या उसकी मिसाइल के हमले विफल करने में होता है।
  • हमले के समय यह कार्ट्रिज विमान से छोड़े जाते हैं। ये दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को उलझा कर बहुमूल्य जेट विमान को टारगेट बनने से बचा सकते हैं।

कार्ट्रिज की ओर मुड़ जाती है मिसाइल
  • आमतौर पर मिसाइलें लड़ाकू विमान से निकलने वाली गर्मी व इंफ्रारेड से उनकी पहचान कर उन्हें टारगेट के रूप में लॉक करती हैं।
  • ऐसे में शाफ तकनीक से लैस लड़ाकू जेट इन छोटे कार्ट्रिज को आसमान में अपने चारों ओर छोड़ने लगते हैं।
  • इंफ्रारेड व गर्मी का पीछा करने की खूबी ही मिसाइलों को अपने लक्ष्य यानी जेट विमान से भटका कर इन कार्ट्रिज की ओर मोड़ती हैं।
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राजस्थान: अब सहारे बिना नहीं चल पा रहा आसाराम, कोरोना ने कर दिया कमजोर

जोधपुर-जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा 80 वर्षीय आसाराम कोरोना संक्रमित होने के बाद से लगातार स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से घिरा हुआ है। गुरुवार को जब उसे जिला न्यायालय में पेश किया गया तो वह कमजोर नजर आ रहा था।

साराम में अब इतनी भी ताकत नहीं रही कि वह अपने बल पर चल पाए। वह पुलिसवालों के सहारे चलता नजर आया। पुलिस की गाड़ी से उतर कर अदालत जाने तक पुलिसकर्मियों  को आसाराम को सहारा देना पड़ा।
 
पुलिसकर्मियों को देना पड़ा सहारा
इस दौरान आसाराम अपने स्वास्थ्य को लेकर परेशान नजर आया। वह पुलिसवालों से कह रहा था कि डॉ. अरुण त्यागी जी से कब कहेंगे इलाज के लिए, तो एक पुलिसवाले ने कहा कि आप कोर्ट में कहो, कोर्ट ऑर्डर देगा तो डॉ. अरुण त्यागी जी आएंगे। आसाराम बेहद धीमी गति से चलता हुआ कोर्ट में गया। कुछ समय पहले जब आसाराम को जेल से बाहर लाया जाता था तो वह खुद पुलिस के वाहन से नीचे उतरता और आराम से चलकर कोर्ट तक पहुंचता था, लेकिन पांच मई को कोरोना की चपेट में आने के बाद से वह शारीरिक रूप से टूट चुका है।

आसाराम शुरू से ही आयुर्वेदिक उपचार लेता रहा है। जब उसे गिरफ्तार किया गया तो उसे आयुर्वेदिक दवाएं देने के लिए उसकी वैद्य नीता जोधपुर आई थी। यौन शोषण के मामले की सुनवाई के दौरान उसे एकबार आयुर्वेद विश्वविद्यालय में भर्ती करवाया गया था। सजा मिलने के बाद अब बीमार होने पर कोर्ट के निर्देश पर उसे जोधपुर में भी आयुर्वेद उपचार दिया जा रहा है। उसका उपचार डॉक्टर अरुण त्यागी कर रहे हैं।

हालांकि कोरोना के बाद से उसे एम्स में भी नियमित चेकअप के लिए ले जाया जाता है, जहां पर आसाराम ने कई बार अंग्रेजी दवा लेने से भी इनकार किया है। वर्तमान में उसे यूरिन इन्फेक्शन और पेट से जुड़ी परेशानियां हैं।
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जहां चाह वहां राह: जोधपुर की सड़कों पर झाड़ू लगाने वाली आशा बनीं आरएएस अधिकारी, पति ने भी छोड़ दिया था साथ

राजस्थान की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा आरएएस परीक्षा- 2018 का अंतिम परिणाम आ गया है। इस बार कुछ ऐसे भी अभ्यर्थी ने सफलता पाई है जो कि दूसरे युवाओं एवं युवतियों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं। उनमें से एक हैं जोधपुर की सफाईकर्मी आशा कंडारा जिन्होंने मुश्किल हालात में भी इस कठिन परीक्षा को पास कर विवाहित और तलाकशुदा महिला के लिए मिसाल बनकर उभरी हैं। आईएएस अवनीश शरण ने उनकी सफलता की कहानी शेयर करते हुए ट्विटर पर लिखा कि कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों। 

मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक आठ साल पहले आशा कंडारा का पति से घरेलू विवाद  के बाद तलाक हो गया था। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने दो बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी निभाते हुए पहले स्नातक पूरा की उसके बाद आरएएस की परीक्षा पास कर एक मिसाल कायम कर दी। इस सफलता से आशा बहुत खुश हैं।

आशा जोधपुर नगर निगम उत्तर में बतौर सफाईकर्मी कार्यरत हैं और सुबह शाम झाड़ू लगाती हैं। लेकिन उन्होंने अपने इस कार्य के साथ कठिन मेहनत जारी रखीं और राजस्थान प्रशासनिक सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफल होकर बता दिया कि महिला भी किसी से कम नहीं।  

निगम में अफसरों के काम काज को देखकर जुनून पैदा हुआ 
आशा कंडारा ने कहा कि नगर निगम में काम करने के दौरान वे अफसरों के काम करने के तरीके को अक्सर देखा करती थी और यहीं से उनके मन में भी अफसर बनने का जुनून पैदा हुआ। स्नातक पूरा करने के बाद उन्होंने आरएएस की तैयारी शुरू कर दी। और आखिर में उनकी मेहनत रंग लाई और सपना भी सच हो गया। 

सोशल मीडिया पर बधाई देने वालों का लगा तांता 
सोशल मीडिया पर लोग आशा को बधाई देने के साथ-साथ उनकी हिम्मत को भी लोग सलाम कर रहे हैं। आईएएस अवनीश शरण से लेकर कई  लोगों ने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से आशा को बधाई  दी।
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Jodhpur Fire: घर में आग लगने से एक ही परिवार के चार लोग जिंदा जले, पुलिस के हाथ लगे कंकाल

राजस्थान के जोधपुर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। दरअसल, यहां के सनसिटी जोधुपर के मिल्कमैन कॉलोनी क्षेत्र में बने एक घर में रविवार (18 जुलाई) की रात को आग लग गई। इस हादसे में परिवार के चारों सदस्यों के जिंदा जल जाने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस को सभी सदस्यों के कंकाल मिले। मरने वालों में बुजुर्ग दपंती और उनकी दो बेटियां थीं, जिनकी आग लगने के कारण मौत हो गई।

शास्त्री नगर के एसएचओ पंकज माथुर ने बताया कि फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों की टीमों ने वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए हैं। जांच चल रही है।



दमकल कर्मियों को मिले चार लोगों के कंकाल
बताया जा रहा है कि घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और फायरबिग्रेड की टीम तुरंत ही मौके पर पहुंच गईं, लेकिन दमकल कर्मियों के बचाव राहत कार्य से पहले ही देर रात परिवार वाले आग की चपेट में पूरी तरह से आ चुके थे। ऐसे में जब वे दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे तो उन्हें केवल चार लोगों के कंकाल मिले। हादसे की सूचना पाकर प्रशासन के आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे। फिलहाल घर में आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। 

स्थानीय लोगों ने पुलिस को आग लगने की दी थी सूचना
बताया जा रहा है कि मृतकों में एक, परिवार के मुखिया 75 वर्षीय सुभाष चौधरी काजरी के रिटायर्ड ऑफिसर थे। रविवार की देर रात चौधरी के घर में आग लगने के कारण 70 साल की उनकी पत्नी नीलम चौधरी, 50 साल की बेटी बेटी पल्लवी चौधरी और 45 साल की बेटी लावण्या चौधरी जीवित ही जल गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने रात के समय अचानक मकान से धुंआ उठते देखा, जिसके बाद पुलिस स्टेशन और दमकल विभाग को सूचना दी। मौके पर पहुंची दमकल ने आग पर काबू पाया और जब घर अंदर से बंद मिला तो दमकलकर्मी दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंचे, जहां उन्हें सुभाष और उनकी पत्नी व दोनों बेटियां एक कमरे में जले हुए मिले।

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संकट: किडनी और आंतों में भी ब्लैक फंगस का संक्रमण, एम्स में 32 वर्षीय मरीज की मौत

जोधपुर एम्स में एक युवक भर्ती हुआ। उसे बुखार और कमर दर्द की शिकायत थी। वह करीब 45 दिन पहले कोरोना संक्रमण से ठीक हुआ था। यहां उसकी दोबारा कोरोना जांच कराई गई जो निगेटिव आई। इसके बाद उसका सीटी स्कैन करवाया गया जिसमें पता चला कि उसकी ब्लड वेन (खून की नस) में ब्लॉकेज है। 

संक्रमण कम करने के लिए एंटीबायोटिक और खून को पतला करने के लिए दवाएं दी गईं। इसके बाद भी संक्रमण समाप्त नहीं हुआ तो उसका ऑपरेशन किया गया। इसमें पता चला कि उसकी किडनी और छोटी-बड़ी आंत में फंगस के काले धब्बे पड़े हुए थे, जिसके चलते संक्रमण ठीक नहीं हुआ और मरीज की मौत हो गई। 

एम्स में भर्ती होने के बाद की गई युवक की जांचों में भी ब्लैक फंगस संक्रमण के लक्षण नहीं दिखे थे। संस्थान के यूरोलॉडी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गौतमराम चौधरी इसे चौंकाने वाला मामला बताते हैं। उल्लेखनीय है कि इंडियन जर्नल ऑफ यूरोलॉजी में इसे अपनी तरह के पहले मामले के रूप में दर्ज किया गया है।

इसके बाद से जोधपुर एम्स में ऐसे छह और मामले सामने आए हैं। इनमें से भी दो मरीजों की मौत हो चुकी है और दो की हालत गंभीर बनी हुई है। बाकी दो मरीजों का इलाज दूसरे अस्पतालों में चल रहा है। कुल मिलाकर किडनी व आंतों में ब्लैक फंगस संक्रमण के एम्स जोधपुर में अब तक कुल सात मामले सामने आ चुके हैं। 
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राजस्थान: जोधपुर में एक बड़ा सड़क हादसा, ट्रक और कार के बीच टक्कर में छह लोगों की हुई मौत

राजस्थान के जोधपुर में रविवार देर रात एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। जोधपुर के डांगियावास इलाके में एक ट्रक और कार के बीच टक्कर हो गई और इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई। जोधपुर पूर्व के डीसीपी भुवन भूपेश यादव ने इस बात की जानकारी दी।

बता दें कि ट्रक और बोलेरो के बीच टक्कर हुई। बोलेरो में सात लोग सवार थे, जिनमें से तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो युवकों ने अस्पताल जाते समय ही अपना दम तोड़ दिया। दरअसल, हाइवे निर्माणीधीन होने की वजह से एक और ट्रैफिक बंद था। ये हादसा इतना भयंकर था कि दो युवकों के सिर कटकर अलग हो गए। 

इस हादसे में बोलेरो पूरी तरह से पिचक गई और युवक आंधे घंटे तक अंदर फंस रहे। पुलिस की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, घटनास्थल पर एक घंटे देरी से एंबुलेंस पहुंची। इसके अलावा डांगियावास थानाधिकारी मय जाब्ता और एसीपी भी मौके पर पहुंचे। ऐसा बताया जा रहा है कि हाइवे पर निर्माण का काम चलने की वजह से कई जगह पर काम पूरा होने के बाद भी आठ से दस किमी तक एक साइड बंद कर रखी थी, इससे भी हादसे हो रहे थे।
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