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Congress: क्या वेणुगोपाल सुलझाएंगे गहलोत-पायलट विवाद?, आज जयपुर में दोनों नेताओं से चर्चा, यात्रा को लेकर बैठक

न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Tue, 29 Nov 2022 04:27 PM IST
सार

गहलोत-पायलट विवाद के बीच मंगलवार को संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल जयपुर पहुंच गए हैं। वेणुगोपाल भारत जोड़ो यात्रा पर बनी 35 बड़े नेताओं की कमेटी की बैठक लेंगे। इस बैठक में सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट भी शामिल होंगे। 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

भारत जोड़ो यात्रा के राजस्थान पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच का विवाद गहरा गया है। गहलोत के पायलट को गद्दार कहने के बाद से दोनों नेताओं के बीच और ठन गई है। उधर, कांग्रेस आलाकमान की ओर से दोनों गुटों को शांत रहने के लिए कहा गया है। आलाकमान इस विवाद को जल्द से जल्द खत्म करना चाहता है।



करीब तीन दिसंबर को भारत जोड़ो यात्रा के साथ राहुल गांधी राजस्थान में प्रवेश करेंगे। ऐसे कांग्रेस आलाकमान चाहता है कि जब तक भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान में रहे तब तक गहलोत और पायलट के बीच कोई विवाद न हो। साथ ही दोनों नेता साथ दिखें, जिससे मैसेज जाए कि पार्टी प्रदेश में एकजुट है। गहलोत-पायलट विवाद के बीच आज मंगलवार को संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल जयपुर पहुंच गए हैं।


केसी वेणुगोपाल भारत जोड़ो यात्रा पर बनी 35 बड़े नेताओं की कमेटी की बैठक लेंगे। इस बैठक में सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट भी शामिल होंगे। गहलोत के गद्दार बयान के बाद दोनों नेता आज पहली बार आमने-सामने होंगे। हालांकि, यह देखना भी अहम होगा कि पायलट बैठक में पहुंचते हैं या नहीं। 

वेणुगोपाल पर विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी
राजस्थान प्रभारी अजय माकन ने 8 नवंबर को पद से इस्तीफे दे दिया था। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को इस्तीफे की पेशकश करते हुए चिट्ठी लिखी थी। इसके बाद से वह राजस्थान का काम नहीं देख रहे हैं। हालांकि, आलाकमान ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है और न ही किसी को इस पद पर नियुक्त किया है। ऐसे में केसी वेणुगोपाल ही राजस्थान का काम देख रहे हैं। वेणुगोपाल पर ही राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा और गहलोत-पायलट विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी है। कहा जा रहा है कि भारत जोड़ो यात्रा की कमेटी की बैठक के बाद वेणुगोपाल गहलोत और पायलट से अलग-अलग चर्चा कर सकते हैं। इस बैठक में भारत जोड़ो यात्रा का पूरा रूट भी तय किया जाएगा। राहुल गांधी की सभा कहां-कहां होगीं इसका भी प्लान तैयार होगा। 

क्या कहा था गहलोत ने? 
24 नवंबर को सीएम अशोक गहलोत ने एक टीवी चैनल को इंटरव्यू में पायलट के खिलाफ कई गंभीर बातें कहीं थीं। गहलोत ने कहा कि पायलट ने गद्दारी की है, वह मुख्यमंत्री नहीं बनाए जा सकते। उन्हें तो दस विधायकों तक का समर्थन भी नहीं है। उन्हें कोई स्वीकार नहीं करेगा। पायलट की गद्दारी को मैंने और हमारे विधायकों ने भुगता है। हमें 34 दिन होटलों में रहना पड़ा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान भी इसमें शामिल थे। सीएम के सवाल पर गहलोत ने कहा कि हाईकमान की ओर से मुझे कोई संकेत नहीं है। मैं हाईकमान के साथ हूं, पायलट को कोई स्वीकार नहीं करेगा। अजय माकन और हाईकमान को मैं अपने दिल की बात बता चुका हूं। राजस्थान में सरकार आना जरूरी है। मैं तीन बार सीएम रह चुका हूं। मेरे लिए सीएम बने रहना जरूरी नहीं है। आप सर्वे करवा लीजिए। मेरे मुख्यमंत्री रहने से सरकार बन सकती है तो मुझे इस कुर्सी पर रहना चाहिए, अगर दूसरे चेहरे से सरकार बन सकती है तो उसे जिम्मेदारी दीजिए। 

पायलट ने किया था पलटवार
गहलोत के बयान का सचिन पायलट ने पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि इस तरह के अनुभवी व्यक्ति को ऐसे शब्द शोभा नहीं देते। गहलोत मुझे निकम्मा, नाकारा, गद्दार और न जाने क्या-क्या कह रहे हैं, लेकिन ऐसी भाषा बोलना मेरी परवरिश का हिस्सा नहीं रही। मेरा बार-बार नाम लेने, कीचड़ उछालने और आरोप-प्रत्यारोप करने से कोई फायदा नहीं होने वाला। कोई नेता इतना अनुभव रखता हो, वरिष्ठ हो और जिसे पार्टी ने इतना कुछ दिया हो, उसके लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना शोभा नहीं देता। इस तरह के झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाने की उनसे उम्मीद नहीं थी। मुझे नहीं पता कि उन्हें मेरे खिलाफ झूठे, बेबुनियाद आरोप लगाने की सलाह कौन दे रहा है। आज पार्टी को मजबूत करने की आवश्यकता है। राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा निकाल रहे हैं। हमें मिलकर इस यात्रा को सफल बनाना है। भाजपा को सिर्फ एक ही पार्टी चुनौती दे सकती है और वह कांग्रेस है। हमें भाजपा को सभी सत्ता वाले राज्यों में चुनौती देने की आवश्यकता है।  

25 सितंबर को क्या हुआ था? 
कांग्रेस आलाकमान ने अजय माकन को पर्यवेक्षक बनाकर विधायक दल की बैठक में भेजा था। विधायकों ने बैठक से दूरी बनाई और आलाकमान के निर्देशों की अवहेलना की। तीन वरिष्ठ विधायकों के घर पर उन्होंने बैठक कर गहलोत पर भरोसा जताया था। उनका आरोप था कि अजय माकन सचिन पायलट के पक्ष में एक लाइन के प्रस्ताव पर मुहर लगवाना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने बैठक का बहिष्कार किया। बैठक के बाद माकन ने शांति धारीवाल, धर्मेंद्र राठौड़ और महेश जोशी सहित तीन नेताओं के खिलाफ अनुशासनहीनता की रिपोर्ट हाईकमान को दी थी। जिसके बाद तीनों को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया था। तीनों नेता अपने जवाब भी दे चुके हैं। इसके बाद भी कांग्रेस आलाकमान ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की है। इससे नाराज होकर राजस्थान प्रभारी अजय माकन ने पद से इस्तीफा दिया था।
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